16-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - योग से ही आत्मा की खाद निकलेगी, बाप से पूरा वर्सा मिलेगा, इसलिए जितना हो सके योगबल बढ़ाओ''

प्रश्नः-
देवी देवताओं के कर्म श्रेष्ठ थे, अभी सबके कर्म भ्रष्ट क्यों बने हैं?

उत्तर:-
क्योंकि अपने असली धर्म को भूल गये हैं। धर्म भूलने के कारण ही जो कर्म करते हैं वह भ्रष्ट होते हैं। बाप तुम्हें अपने सत धर्म की पहचान देते हैं, साथ-साथ सारे वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी सुनाते हैं, जो सबको सुनानी है, बाप का सत्य परिचय देना है।

गीत:-
मुखड़ा देख ले प्राणी....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) याद से पावन बन बाप के गले का हार बनना है। कर्म करते भी बाप की याद में रह विकर्माजीत बनना है।

2) पुण्य आत्मा बनने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करना है। देह-अभिमान छोड़ देही-अभिमानी बनना है।

वरदान:-
अपने बुद्धि रूपी नेत्र को क्लीयर और केयरफुल रखने वाले मास्टर नॉलेजफुल, पावरफुल भव

जैसे ज्योतिषी अपने ज्योतिष की नॉलेज से, ग्रहों की नॉलेज से आने वाली आपदाओं को जान लेते हैं, ऐसे आप बच्चे इनएडवांस माया द्वारा आने वाले पेपर्स को परखकर पास विद आनर बनने के लिए अपने बुद्धि रूपी नेत्र को क्लीयर बनाओ और केयरफुल रहो। दिन प्रतिदिन याद की वा साइलेन्स की शक्ति को बढ़ाओ तो पहले से ही मालूम पड़ेगा कि आज कुछ होने वाला है। मास्टर नॉलेजफुल, पावरफुल बनो तो कभी हार नहीं हो सकती।

स्लोगन:-
पवित्रता ही नवीनता है और यही ज्ञान का फाउण्डेशन है।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

आप बच्चों की चलन में मधुरता और मन्सा में बेहद की वैराग्य वृत्ति हो। दोनों स्मृति रहे तो पास विद आनर्स बन जायेंगे। मधुरता और नम्रता इन विशेष दो धारणाओं से सदा विश्व कल्याणकारी, महादानी, वरदानी बन जायेंगे और सहज ही स्नेह का सबूत दे सकेंगे।