16-08-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 16.03.2011 "बापदादा" मधुबन
“मन्सा द्वारा प्रकृति
को सतोगुणी बनाने की सेवा करो, शुभ भावना, शुभकामना रख संस्कार मिलन की रास करो''
वरदान:-
हर संकल्प और
कर्म में सिद्धि अर्थात् सफलता प्राप्त करने वाले सम्पूर्ण मूर्त भव
संकल्पों की सिद्धि
तब प्राप्त होगी जब समर्थ संकल्पों की रचना करेंगे। जो अधिक संकल्पों की रचना करते
हैं वह उनकी पालना नहीं कर पाते इसलिए जितनी रचना ज्यादा उतनी शक्तिहीन होती है। तो
पहले व्यर्थ रचना बन्द करो तब सफलता प्राप्त होगी और कर्मों में सफलता प्राप्त करने
की युक्ति है - कर्म करने से पहले आदि-मध्य और अन्त को जानकर फिर कर्म करो। इससे ही
सम्पूर्ण मूर्त बन जायेंगे।
स्लोगन:-
समय पर दु:ख और धोखे से बचकर सफल होने वाला ही ज्ञानी (समझदार) है।
ये अव्यक्त इशारे:
अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो
आप होलीहंस बच्चों का
आहार भी शुद्ध, व्यवहार भी शुद्ध, अशुद्धि का नाम निशान भी न हो क्योंकि शुद्ध
दुनिया में जा रहे हो जहाँ अपवित्रता वा अशुद्धि का नामनिशान नहीं है। जब ऐसे
होलीहंस बनते हो तब भविष्य में हिज़ होलीनेस कहलाते हो।
विशेष सूचना - मास के
तीसरे रविवार का योग अभ्यास
आज मास का तीसरा
रविवार है, सभी भाई बहिनें संगठित रूप में एकत्रित होकर सायं 6.30 से 7.30 बजे तक
अपने परम पवित्र स्वरूप में स्थित हो, पवित्रता की दिव्य किरणें फैलाते हुए सर्व
आत्माओं को “पवित्र बनो-योगी बनो'' की शुभ प्रेरणायें सकाश रूप में देना की सेवा करें।