17-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - पावन बनो तो
रूहानी सेवा के लायक बनेंगे, देही-अभिमानी बच्चे रूहानी यात्रा पर रहेंगे और दूसरों
को भी यही यात्रा करायेंगे''
प्रश्नः-
संगम पर तुम
बच्चे जो कमाई करते हो, यही सच्ची कमाई है - कैसे?
उत्तर:-
अभी की जो
कमाई है वह 21 जन्म तक चलती है, इसका कभी भी देवाला नहीं निकलता। ज्ञान सुनना और
सुनाना, याद करना और कराना - यही है सच्ची-सच्ची कमाई, जो सच्चा-सच्चा बाप ही तुम्हें
सिखलाता है। ऐसी कमाई सारे कल्प में कोई भी कर न सके। दूसरी कोई भी कमाई साथ नहीं
चलती।
गीत:-
हमें उन राहों
पर चलना है....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) यह ईश्वरीय जीवन बहुत-बहुत अमूल्य है, इस जीवन में आत्मा और शरीर दोनों
को पावन बनाना है। रूहानी यात्रा में रहकर दूसरों को यही यात्रा सिखानी है।
2) जितना हो सके - सच की कमाई में लग जाना है। निरोगी बनने के लिए याद में मजबूत
होना है।
वरदान:-
शरीर को
ईश्वरीय सेवा के लिए अमानत समझकर कार्य में लगाने वाले नष्टोमोहा भव
जैसे कोई की अमानत होती है
तो अमानत में अपनापन नहीं होता, ममता भी नहीं होती है। तो यह शरीर भी ईश्वरीय सेवा
के लिए एक अमानत है। यह अमानत रूहानी बाप ने दी है तो जरूर रूहानी बाप की याद रहेगी।
अमानत समझने से रूहानियत आयेगी, अपने पन की ममता नहीं रहेगी। यही सहज उपाय है
निरन्तर योगी, नष्टोमोहा बनने का। तो अब रूहानियत की स्थिति को प्रत्यक्ष करो।
स्लोगन:-
वानप्रस्थ स्थिति में जाना है तो दृष्टि-वृत्ति में भी पवित्रता को अण्डरलाइन करो।
ये अव्यक्त इशारे
- महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
आपका हर बोल महान
हो। हर मंसा संकल्प हर आत्मा के प्रति मधुर हो। हर एक को ऊंचा उठाने का स्वभाव,
मधुरता का स्वभाव, निर्माणता का स्वभाव हो। मेरा स्वभाव ऐसा है, यह कभी नहीं बोलना।
मेरा कहाँ से आया! मेरा तेज़ बोलने का स्वभाव है, मेरा आवेश में आने का स्वभाव है।
स्वभाव के वश होना यही माया है। अब मायाजीत बनो। अभिमान वा दिलशिकस्त होने के,
ईर्ष्या वा आवेश में आने के स्वभाव का परिवर्तन करो।