17-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 16.11.2006 "बापदादा" मधुबन
अपने स्वमान की शान
में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो
वरदान:-
बाह्यमुखी
चतुराई से मुक्त रहने वाले बाप पसन्द सच्चे सौदागर भव
बापदादा को दुनिया की
बाह्यमुखी चतुराई पसन्द नहीं। कहा जाता है भोलों का भगवान। चतुर सुजान को भोले बच्चे
ही पसन्द हैं। परमात्म डायरेक्टरी में भोले बच्चे ही विशेष वी.आई.पी.हैं। जिनमें
दुनिया वालों की आंख नहीं जाती - वही बाप से सौदा करके परमात्म नयनों के सितारे बन
गये। भोले बच्चे ही दिल से कहते “मेरा बाबा'', इसी एक सेकण्ड के एक बोल से अनगिनत
खजाने का सौदा करने वाले सच्चे सौदागर बन गये।
स्लोगन:-
सर्व का स्नेह प्राप्त करना है तो मुख से सदा मीठे बोल बोलो।
अव्यक्त-इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
जो सदा बाप की याद
में लवलीन अर्थात् समाये हुए हैं। ऐसी आत्माओं के नैनों में और मुख के हर बोल में
बाप समाया हुआ होने के कारण शक्ति-स्वरुप के बजाय सर्व शक्तिवान् नज़र आयेगा। जैसे
आदि स्थापना में ब्रह्मा रुप में सदैव श्रीकृष्ण दिखाई देता था, ऐसे आप बच्चों
द्वारा सर्वशक्तिवान् दिखाई दे।
सूचनाः- आज मास का
तीसरा रविवार है, सभी राजयोगी तपस्वी भाई बहिनें सायं 6.30 से 7.30 बजे तक, विशेष
योग अभ्यास के समय अपने पूर्वज पन के स्वमान में स्थित हो, कल्प वृक्ष की जड़ों में
बैठ पूरे वृक्ष को शक्तिशाली योग का दान देते हुए, अपनी वंशावली की दिव्य पालना करें।