18-01-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति "बापदादा"    मधुबन


“बापदादा के अनमोल महावाक्य - पिताश्री जी के पुण्य स्मृति दिवस पर प्रात:क्लास में सुनाने के लिए''
“मीठे बच्चे, ज्ञान रत्नों से झोली भरकर दान भी करना है, जितना दूसरों को रास्ता बतायेंगे उतना आशीर्वाद मिलेगी''


वरदान:-
व्यक्त में रहते अव्यक्त फरिश्ते रूप का साक्षात्कार कराने वाले सफेद वस्त्रधारी और सफेद लाइटधारी भव

जैसे अभी चारों ओर यह आवाज फैल रहा है कि यह सफेद वस्त्रधारी कौन हैं और कहाँ से आये हैं! ऐसे अब चारों ओर फरिश्ते रूप का साक्षात्कार कराओ - इसको कहा जाता है डबल सेवा का रूप। जैसे बादल चारों ओर छा जाते हैं, ऐसे चारों ओर फरिश्ते रूप से प्रगट हो जाओ, जहाँ भी देखें तो फरिश्ते ही नज़र आयें। लेकिन यह तब होगा जब शरीर से डिटैच होकर अन्त:वाहक शरीर से चक्र लगाने के अभ्यासी होंगे। मन्सा पावरफुल होगी।

स्लोगन:-
सर्व गुणों वा सर्व शक्तियों के अधिकारी बनने के लिए आज्ञाकारी बनो।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

जैसे बाप सदा स्वतंत्र है - ऐसे बाप समान बनो। बापदादा अब बच्चों को परतंत्र देख नहीं सकते। अगर स्वयं को स्वतंत्र नहीं कर सकते हो, स्वयं ही अपनी कमजोरियों में गिरते रहते हो तो विश्व परिवर्तक कैसे बनेंगे! अब इस स्मृति को बढ़ाओ कि मैं मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ, इससे सहज सर्व पिंजड़ों से मुक्त उड़ता पंछी बन जायेंगे।