18-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम इस
युनिवर्सिटी में आये हो पुरानी दुनिया से मरकर नई दुनिया में जाने, अभी तुम्हारी
प्रीत एक भगवान से हुई है''
प्रश्नः-
किस विधि से
बाप की याद तुम्हें साहूकार बना देती है?
उत्तर:-
बाप है बिन्दु।
तुम बिन्दु बन बिन्दु को याद करो तो साहूकार बन जायेंगे। जैसे एक के साथ बिन्दु
लगाओ तो 10 फिर बिन्दु लगाओ तो 100, फिर 1000 हो जाता। ऐसे बाप की याद से बिन्दु
लगती जाती है। तुम धनवान बनते जाते हो। याद में ही सच्ची कमाई है।
गीत:-
महफिल में जल
उठी शमा........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) हम गॉडली स्टूडेन्ट्स हैं, यह सदैव स्मृति में रखना है। कोई भी छी-छी
आदत नहीं डालनी है। उन्हें मिटाना है। विकार का ज़रा भी ख्याल नहीं आना चाहिए।
2) जीते जी शरीर का भान भूलकर बाप को याद करना है। भिन्न-भिन्न प्वॉइन्ट्स विचार
सागर मंथन कर पतितों को पावन बनाने का धन्धा करना है।
वरदान:-
सन्तुष्टता के
त्रिमूर्ति सर्टीफिकेट द्वारा सदा सफलता प्राप्त करने वाले ऊंच पद के अधिकारी भव
सदा सफल होने के लिए बाप
और परिवार से ठीक कनेक्शन चाहिए। हर एक को तीन सर्टीफिकेट लेने हैं - बाप, आप और
परिवार। परिवार को सन्तुष्ट करने के लिए छोटी सी बात याद रखो - कि रिगार्ड देने का
रिकार्ड निरन्तर चलता रहे, इसमें निष्काम बनो। बाप को सन्तुष्ट करने के लिए सच्चे
बनो। और स्वयं से सन्तुष्ट रहने के लिए सदा श्रीमत की लकीर के अन्दर रहो। ये तीन
सर्टीफिकेट ऊंच पद का अधिकारी बना देंगे।
स्लोगन:-
जो
चित्र को न देख चैतन्य और चरित्र को देखते हैं वही श्रेष्ठ चरित्रवान हैं।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
जैसे सर्व आत्माओं
को ज्ञान की रोशनी देने के लिये सदैव शुभ भावना व कल्याण की भावना रखते हो। ऐसे अपने
इस दैवी संगठन को भी एक-रस स्थिति में स्थित कर संगठन की शक्ति को बढ़ाने का
प्रयत्न करो तब आपके इस दैवी संगठन की मूर्त में एकता और एकरस स्थिति का प्रत्यक्ष
रूप में साक्षात्कार होगा।