18-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे-मीठे सर्विसएबुल
बच्चे - ऐसा कोई भी काम नहीं करना जिससे सर्विस में कोई भी विघ्न पड़े''
प्रश्नः-
संगमयुग पर
तुम बच्चों को बिल्कुल एक्यूरेट बनना है, एक्यूरेट कौन बन सकते हैं?
उत्तर:-
जो सच्चे बाप
के साथ सदा सच्चे रहते हैं, अन्दर एक, बाहर दूसरा - ऐसा न हो। 2- जो शिवबाबा के
सिवाए और बातों में नहीं जाते हैं। 3- हर कदम श्रीमत पर चलते हैं, कोई भी ग़फलत नहीं
करते, वही एक्यूरेट बनते हैं।
गीत:-
बचपन के दिन
भुला न देना......
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अन्दर बाहर सच्चा रहना है। पढ़ाई में कभी भी ग़फलत नहीं करना है। कभी
भी संशय बुद्धि बन पढ़ाई नहीं छोड़नी है। सर्विस में विघ्न रूप नहीं बनना है।
2) सबको यही खुशखबरी सुनाओ कि हम पवित्रता के बल से, श्रीमत पर अपने तन-मन-धन के
सहयोग से 21 जन्मों के लिए भारत को श्रेष्ठाचारी डबल सिरताज बनाने की सेवा कर रहे
हैं।
वरदान:-
सदा पुण्य का
खाता जमा करने और कराने वाले मास्टर शिक्षक भव
हम मास्टर शिक्षक हैं,
मास्टर कहने से बाप स्वत: याद आता है। बनाने वाले की याद आने से स्वयं निमित्त हूँ
- यह स्वत: स्मृति में आ जाता है। विशेष स्मृति रहे कि हम पुण्य आत्मा हैं, पुण्य
का खाता जमा करना और कराना - यही विशेष सेवा है। पुण्य आत्मा कभी पाप का एक परसेन्ट
संकल्प मात्र भी नहीं कर सकती। मास्टर शिक्षक माना सदा पुण्य का खाता जमा करने और
कराने वाले, बाप समान।
स्लोगन:-
संगठन
के महत्व के जानने वाले संगठन में ही स्वयं की सेफ्टी का अनुभव करते हैं।
ये अव्यक्त इशारे-
“निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
जो जितना
निश्चयबुद्धि होगा उतना ही सभी बातों में विजयी होगा। निश्चयबुद्धि की कभी हार नहीं
होती। हार होती है तो समझना चाहिए कि निश्चय की कमी है। निश्चयबुद्धि विजयी रत्नों
में से हम एक रत्न हैं, ऐसे अपने को समझना है। कोई भी विघ्न आए तो उनको पेपर समझ
पास करना है। बात को नहीं देखना है लेकिन पेपर समझ पास होना है।