18-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम ही सच्चे
अलौकिक जादूगर हो, तुम्हें मनुष्य को देवता बनाने का जादू दिखाना है''
प्रश्नः-
अच्छे
पुरुषार्थी स्टूडेन्ट की निशानी क्या होगी?
उत्तर:-
वह पास विद्
ऑनर होने का अर्थात् विजय माला में आने का लक्ष्य रखेंगे। उनकी बुद्धि में एक बाप
की ही याद होगी। देह सहित देह के सब सम्बन्धों से बुद्धियोग तोड़ एक से प्रीत रखेंगे।
ऐसे पुरुषार्थी ही माला का दाना बनते हैं।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इसी रूहानी नशे में रहना है कि बाबा हमें डबल सिरताज बना रहे हैं। हम
हैं स्वदर्शन चक्रधारी ब्राह्मण। पास्ट, प्रेजन्ट, फ्युचर का ज्ञान बुद्धि में रखकर
चलना है।
2) पास विद् ऑनर होने के लिए बाप से सच्ची-सच्ची प्रीत रखनी है। बाप को याद करने
की गुप्त मेहनत करनी है।
वरदान:-
अपने डबल लाइट
स्वरूप द्वारा आने वाले विघ्नों को पार करने वाले तीव्र पुरुषार्थी भव
आने वाले विघ्नों में थकने
वा दिलशिकस्त होने के बजाए सेकण्ड में स्वयं के आत्मिक ज्योति स्वरूप और निमित्त
भाव के डबल लाइट स्वरूप द्वारा सेकण्ड में हाई जम्प दो। विघ्न रूपी पत्थर को तोड़ने
में समय नहीं गँवाओ। जम्प लगाओ और सेकण्ड में पार हो जाओ। थोड़ी सी विस्मृति के
कारण सहज मार्ग को मुश्किल नहीं बनाओ। अपने जीवन की भविष्य श्रेष्ठ मंजिल को स्पष्ट
देखते हुए तीव्र पुरुषार्थी बनो। जिस नज़र से बाप-दादा वा विश्व आपको देख रही है उसी
श्रेष्ठ स्वरूप में सदा स्थित रहो।
स्लोगन:-
सदा
खुश रहना और खुशी बांटना - यही सबसे बड़ा शान है।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
अब संगठित रुप में
एक ही शुद्ध संकल्प अर्थात् एकरस स्थिति बनाने का अभ्यास करो तब ही विश्व के अन्दर
शक्ति सेना का नाम बाला होगा। जब चाहे शरीर का आधार लो और जब चाहे शरीर का आधार
छोड़कर अपने अशरीरी स्वरूप में स्थित हो जाओ। जैसे शरीर धारण किया वैसे ही शरीर से
न्यारे हो जायें, यही अनुभव अन्तिम पेपर में फर्स्ट नम्बर लाने का आधार है।