19-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें नशा रहना चाहिए कि हम ब्राह्मण सो देवता बनते हैं, हम ब्राह्मणों को ही बाप की श्रेष्ठ मत मिलती है''

प्रश्नः-
जिनका न्यु ब्लड है उन्हें कौन सा शौक और कौन सी मस्ती होनी चाहिए?

उत्तर:-
यह दुनिया जो पुरानी आइरन एजड बन गई है, उसे नई गोल्डन एजेड बनाने का, पुराने से नया बनाने का शौक होना चाहिए। कन्याओं का न्यु ब्लड है तो अपने हमजिन्स को उठाना चाहिए। नशा कायम रखना चाहिए। भाषण करने में भी बड़ी मस्ती होनी चाहिए।

गीत:-
रात के राही.....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) श्री श्री शिवबाबा की श्रेष्ठ मत पर चलकर स्वयं को श्रेष्ठ बनाना है। श्रीमत में मनमत मिक्स नहीं करनी है। ईश्वरीय पढ़ाई के नशे में रहना है।

2) अपने हमजिन्स के कल्याण की युक्तियाँ रचनी हैं। सबके प्रति शुभभावना रखते हुए एक-दो को सच्चा मान देना है। लंगड़ा मान नहीं।

वरदान:-
निरन्तर बाप के साथ की अनुभूति द्वारा हर सेकण्ड, हर संकल्प में सहयोगी बनने वाले सहजयोगी भव

जैसे शरीर और आत्मा का जब तक पार्ट है तब तक अलग नहीं हो पाती है, ऐसे बाप की याद बुद्धि से अलग न हो, सदा बाप का साथ हो, दूसरी कोई भी स्मृति अपने तरफ आकर्षित न करे - इसको ही सहज और स्वत: योगी कहा जाता है। ऐसा योगी हर सेकण्ड, हर संकल्प, हर वचन, हर कर्म में सहयोगी होता है। सहयोगी अर्थात् जिसका एक संकल्प भी सहयोग के बिना न हो। ऐसे योगी और सहयोगी शक्तिशाली बन जाते हैं।

स्लोगन:-
समस्या स्वरुप बनने के बजाए, समस्या को मिटाने वाले समाधान स्वरुप बनो।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

अपने स्थूल और सूक्ष्म बन्धनों की लिस्ट सामने रखो। लक्ष्य रखो कि मुझे बन्धनमुक्त बनना ही है। “अब नहीं तो कब नहीं'' - सदा यही पाठ पक्का करो। “स्वतंत्रता ब्राह्मण जन्म का अधिकार है''- अपना जन्म सिद्ध अधिकार प्राप्त कर जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो। जब अपने को गृहस्थी समझते हो तब गृहस्थी का जाल होता। गृहस्थी बनना माना जाल में फँसना। ट्रस्टी अर्थात् मुक्त।