19-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अभी भारत
खास और आम सारी दुनिया पर ब्रह्स्पति की दशा बैठनी है, बाबा तुम बच्चों द्वारा भारत
को सुखधाम बना रहे हैं''
प्रश्नः-
16 कला
सम्पूर्ण बनने के लिए तुम बच्चे कौन सा पुरुषार्थ करते हो?
उत्तर:-
योगबल जमा करने
का। योगबल से तुम 16 कला सम्पूर्ण बन रहे हो। इसके लिए बाप कहते हैं दे दान तो छूटे
ग्रहण। काम विकार जो गिराने वाला है इसका दान दो तो तुम 16 कला सम्पूर्ण बन जायेंगे।
2- देह-अभिमान को छोड़ देही-अभिमानी बनो, शरीर का भान छोड़ दो।
गीत:-
तुम मात पिता.......
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) जो भी अन्दर में कांटे हैं उनकी जांच कर निकालना है। रामपुरी में चलने
का पुरुषार्थ करना है।
2) अविनाशी ज्ञान रत्नों का सौदा कर किसी का भी कल्याण करने में समय देना है।
हसीन बनना और बनाना है।
वरदान:-
तमोगुणी
वायुमण्डल में अपनी स्थिति एकरस, अचल-अडोल रखने वाले मास्टर सर्वशक्तिमान् भव
दिन-प्रतिदिन परिस्थितियां
अति तमोप्रधान बननी हैं, वायुमण्डल और भी बिगड़ने वाला है। ऐसे वायुमण्डल में कमल
पुष्प समान न्यारे रहना, अपनी स्थिति सतोप्रधान बनाना - इसके लिए इतनी हिम्मत वा
शक्ति की आवश्यकता है। जब यह वरदान स्मृति में रहता कि मैं मास्टर सर्वशक्तिमान्
हूँ तो चाहे प्रकृति द्वारा, चाहे लौकिक सम्बन्ध द्वारा, चाहे दैवी परिवार द्वारा
कोई भी परीक्षा आ जाए - उसमें सदा एकरस, अचल-अडोल रहेंगे।
स्लोगन:-
वरदाता
बाप को अपना सच्चा साथी बना लो तो वरदानों से झोली भरी रहेगी।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
इस परमात्म-ज्ञान
से ही विश्व में एक धर्म, एक राज्य, एक मत की स्थापना होती है। आपके इस ब्राह्मण
संगठन के एकमत की विशेषता - देवता रूप में प्रैक्टिकल चलती है। यह विशेषता ही कमाल
करेगी, इससे ही नाम बाला होगा, प्रत्यक्षता होगी। तो इस विशेषता में नम्बरवन बनो।
इसके लिए जो अपना मूल संस्कार है, उसको मिटाकर बापदादा के संस्कारों को कॉपी कर
समान और सम्पूर्ण बनो तब हर एक से बाप दिखाई देगा और प्रत्यक्षता होगी।