19-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - जैसे बापदादा
दोनों निरहंकारी हैं, देही-अभिमानी हैं, ऐसे फॉलो फादर करो, तो सदा उन्नति होती
रहेगी''
प्रश्नः-
ऊंच पद की
प्राप्ति के लिए कौन सी खबरदारी रखना जरूरी है?
उत्तर:-
ऊंच पद पाना
है तो खबरदारी रखो कि मन्सा से भी किसी को मेरे द्वारा दु:ख न हो, 2- किसी भी
परिस्थिति में क्रोध न आये, 3- बाप का बनकर बाप के कार्य में, इस रूद्र यज्ञ में
विघ्न रूप न बनें। अगर कोई मुख से बाबा-बाबा कहे और चलन रॉयल न हो तो ऊंच पद नहीं
मिल सकता।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बोलने चलने में बहुत रॉयल बनना है। मुख से सदैव रत्न निकालने हैं। आप
समान बनाने की सेवा करनी है। किसी की दिल को रंज नहीं करना है।
2) क्रोध पर बड़ी खबरदारी रखनी है। मुखड़ा सदैव देवताओं जैसा हर्षित रखना है।
स्वयं को ज्ञान योगबल से देवता बनाना है।
वरदान:-
पावरफुल दर्पण
द्वारा सभी को स्वयं का साक्षात्कार कराने वाले साक्षात्कारमूर्त भव
जैसे दर्पण के आगे जो भी
जाता है, उसे स्वयं का स्पष्ट साक्षात्कार हो जाता है। लेकिन अगर दर्पण पावरफुल नहीं
तो रीयल रूप के बजाए और रूप दिखाई देता है। होगा पतला दिखाई देगा मोटा, इसलिए आप ऐसे
पावरफुल दर्पण बन जाओ, जो सभी को स्वयं का साक्षात्कार करा सको अर्थात् आपके सामने
आते ही देह को भूल अपने देही रूप में स्थित हो जायें - वास्तविक सर्विस यह है, इसी
से जय-जयकार होगी।
स्लोगन:-
शिक्षाओं को स्वरूप में लाने वाले ही ज्ञान स्वरूप, प्रेम स्वरूप आत्मा हैं।
ये अव्यक्त इशारे-
“निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
बाप में तो निश्चय
है लेकिन अपने में भी निश्चयबुद्धि होकर कार्य करो तो फिर विजय ही विजय है। विजय के
आगे समस्या कोई चीज़ नहीं है। फिर वह समस्या नहीं फील होगी लेकिन खेल फील होगा। खेल
खुशी से किया जाता है। कोई कार्य सहज होता है तो कहा जाता यह तो बायें हाथ का खेल
है अर्थात् सहज है। तो यह भी बुद्धि का खेल हो जायेगा। खेल में घबरायेंगे नहीं।