19-04-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 15.12.2009 "बापदादा"    मधुबन


“ परिवार के साथ प्रीत निभाने के लिए नॉलेजफुल बन बाप समान साक्षीपन की स्थिति में रहना है , बाप , स्व , ड्रामा और परिवार चारों में निश्चयबुद्धि बन विजयी बनना है ''


वरदान:-
विधाता के साथ - साथ वरदाता बन सर्व आत्माओं में बल भरने वाले रहमदिल भव

यदि कोई आत्मा इच्छुक है लेकिन हिम्मत न होने के कारण चाहना होते भी प्राप्ति नहीं कर सकती तो ऐसी आत्माओं के लिए विधाता अर्थात् ज्ञान दाता बनने के साथ-साथ रहमदिल बन वरदाता बनो, उन्हें अपनी शुभ भावना का एक्स्ट्रा बल दो। लेकिन ऐसे वरदानी मूर्त तभी बन सकते, जब आपका हर संकल्प बाप के प्रति कुर्बान हो। हर समय, हर संकल्प, हर कर्म में वारी जाऊं का जो वचन लिया है, उसे पालन करो।

स्लोगन:-
अपने सत्य स्वरूप की स्मृति हो तो सत्यता की शक्ति आ जायेगी।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

बापदादा अब एक-एक बच्चे के मस्तक में सम्पूर्ण पवित्रता की चमकती हुई मणी देखने चाहते हैं। रूहानियत से चमकते हुए नयन देखने चाहते हैं, बोल में मधुरता, विशेषता, अमूल्य बोल सुनने चाहते हैं और कर्म में सन्तुष्टता, निर्माणता सदा देखने चाहते हैं।

विशेष सूचना - मास के तीसरे रविवार का योग अभ्यास

आज मास का तीसरा रविवार है, सभी भाई बहिनें संगठित रूप में एकत्रित होकर सायं 6.30 से 7.30 बजे तक पूरे ग्लोब को सम्मुख इमर्ज कर पवित्रता के श्रेष्ठ वायब्रेशन देने की सेवा करें। चारों ओर के चिंता, भय और दु:ख के वायुमण्डल में अपने रहमदिल मास्टर दाता स्वरूप से शान्ति और शक्ति की सकाश फैलायें।