19-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अपने
स्वधर्म को भूलना ही सबसे बड़ी भूल है, अभी तुम्हें अभुल बनना है, अपने घर और राज्य
को याद करना है''
प्रश्नः-
आप बच्चों की
कौन-सी अवस्था ही समय के समीपता की निशानी है?
उत्तर:-
आप बच्चे जब
याद की यात्रा में सदा मस्त रहेंगे, बुद्धि का भटकना बन्द हो जायेगा, वाणी में याद
का जौहर आ जायेगा, अपार खुशी में रहेंगे, घड़ी-घड़ी अपनी सतयुगी दुनिया के नज़ारे
सामने आते रहेंगे तब समझो समय समीप है। विनाश में टाइम नहीं लगता, इसके लिए याद का
चार्ट बढ़ाना है।
गीत:-
तुम्हें पाके
हमने जहान पा लिया है........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सदा इसी नशे में रहना है कि हम अभी यह पढ़ाई पूरी कर मनुष्य से देवता
सो विश्व के मालिक बनेंगे। हमारे राज्य में पवित्रता-सुख-शान्ति सब कुछ होगा। उसे
कोई छीन नहीं सकता।
2) इस पार से उस पार जाने के लिए याद की यात्रा में अच्छा तैराक बनना है। माया
के घुटके नहीं खाने हैं। अपनी जांच करनी है, याद के चार्ट को यथार्थ समझकर लिखना
है।
वरदान:-
पुरुषार्थ और
प्रालब्ध के हिसाब को जानकर तीव्रगति से आगे बढ़ने वाले नॉलेजफुल भव
पुरुषार्थ द्वारा बहुतकाल
की प्रालब्ध बनाने का यही समय है इसलिए नॉलेजफुल बन तीव्रगति से आगे बढ़ो। इसमें यह
नहीं सोचो कि आज नहीं तो कल बदल जायेंगे। इसे ही अलबेलापन कहा जाता है। अभी तक
बापदादा स्नेह के सागर बन सर्व सम्बन्ध के स्नेह में बच्चों का अलबेलापन, साधारण
पुरुषार्थ देखते सुनते भी एकस्ट्रा मदद से, एकस्ट्रा मार्क्स देकर आगे बढ़ा रहे
हैं। तो नॉलेजफुल बन हिम्मत और मदद के विशेष वरदान का लाभ लो।
स्लोगन:-
प्रकृति
का दास बनने वाले ही उदास होते हैं, इसलिए प्रकृतिजीत बनो।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
जैसे कोई सागर में
समा जाए तो उस समय सिवाय सागर के और कुछ नज़र नहीं आयेगा। तो बाप अर्थात् सर्वगुणों
के सागर में समा जाना, इसको कहा जाता है लवलीन स्थिति। तो बाप में नहीं समाना है,
लेकिन बाप की याद में, स्नेह में समा जाना है।