19-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हें
सदैव याद की फाँसी पर चढ़े रहना है, याद से ही आत्मा सच्चा सोना बनेगी''
प्रश्नः-
कौन-सा बल
क्रिमिनल आंखों को फौरन ही बदल देता है?
उत्तर:-
ज्ञान के तीसरे
नेत्र का बल जब आत्मा में आ जाता है तो क्रिमिनलपन समाप्त हो जाता है। बाप की
श्रीमत है - बच्चे, तुम सब आपस में भाई-भाई हो, भाई-बहन हो, तुम्हारी आंखें कभी भी
क्रिमिनल हो नहीं सकती। तुम सदैव याद की मस्ती में रहो। वाह तकदीर वाह! हमें भगवान
पढ़ाते हैं। ऐसे विचार करो तो मस्ती चढ़ी रहेगी।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) एकान्त में बैठ अपने आपसे बातें करनी है। आत्मा पर जो जंक चढ़ी है उसे
उतारने के लिए याद की यात्रा पर रहना है।
2) किसी भी बात में संशय नहीं उठाना है, ईर्ष्या नहीं करनी है। आन्तरिक खुशी में
रहना है। अपनी गुप्त सर्विस करनी है।
वरदान:-
बेगर टू
प्रिन्स का पार्ट प्रैक्टिकल में बजाने वाले त्यागी वा श्रेष्ठ भाग्यशाली आत्मा भव
जैसे भविष्य में विश्व
महाराजन दाता होंगे। ऐसे अभी से दातापन के संस्कार इमर्ज करो। किसी से कोई सैलवेशन
लेकरके फिर सैलवेशन दें - ऐसा संकल्प में भी न हो - इसे ही कहा जाता है बेगर टू
प्रिन्स। स्वयं लेने की इच्छा वाले नहीं। इस अल्पकाल की इच्छा से बेगर। ऐसा बेगर ही
सम्पन्न मूर्त है। जो अभी बेगर टू प्रिन्स का पार्ट प्रैक्टिकल में बजाते हैं उन्हें
कहा जाता है सदा त्यागी वा श्रेष्ठ भाग्यशाली। त्याग से सदाकाल का भाग्य स्वत:बन
जाता है।
स्लोगन:-
सदा
हर्षित रहने के लिए साक्षीपन की सीट पर दृष्टा बनकर हर खेल देखो।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
अशरीरी स्थिति का
अनुभव करने के लिए सूक्ष्म संकल्प रुप में भी कहाँ लगाव न हो, सम्बन्ध के रुप में,
सम्पर्क के रूप में अथवा अपनी कोई विशेषता की तरफ भी लगाव न हो। अगर अपनी कोई
विशेषता में भी लगाव है तो वह भी लगाव बन्धन-युक्त कर देगा और वह लगाव अशरीरी बनने
नहीं देगा।