20-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बेहद के बाप को याद करना - यह है गुप्त बात, याद से याद मिलती है, जो याद नहीं करते उन्हें बाप भी कैसे याद करें ''

प्रश्नः-
संगम पर तुम बच्चे कौन सी पढ़ाई पढ़ते हो जो सारा कल्प नहीं पढ़ाई जाती?

उत्तर:-
जीते जी शरीर से न्यारा अर्थात् मुर्दा होने की पढ़ाई अभी पढ़ते हो क्योंकि तुम्हें कर्मातीत बनना है। बाकी जब तक शरीर में हैं तब तक कर्म तो करना ही है। मन भी अमन तब हो जब शरीर न हो इसलिए मन जीते जगत-जीत नहीं, लेकिन माया जीते जगतजीत।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) शरीर से न्यारी आत्मा हूँ, जीते जी इस शरीर में रहते जैसे मुर्दा - इस स्थिति के अभ्यास से कर्मातीत अवस्था बनानी है।

2) सर्विस का सबूत देना है। देहभान को छोड़ अपना सच्चा-सच्चा समाचार देना है। पास विद् ऑनर होने का पुरुषार्थ करना है।

वरदान:-
अपने शान्त स्वरुप स्टेज द्वारा शान्ति की किरणें फैलाने वाले मास्टर शान्ति सागर भव

वर्तमान समय विश्व के मैजारिटी आत्माओं को सबसे ज्यादा आवश्यकता है - सच्चे शान्ति की। अशान्ति के अनेक कारण दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं और बढ़ते जायेंगे। अगर स्वयं अशान्त नहीं भी होंगे तो औरों के अशान्ति का वायुमण्डल, वातावरण शान्त अवस्था में बैठने नहीं देगा। अशान्ति के तनाव का अनुभव बढ़ेगा। ऐसे समय पर आप मास्टर शान्ति के सागर बच्चे अशान्ति के संकल्पों को मर्ज कर विशेष शान्ति के वायब्रेशन फैलाओ।

स्लोगन:-
बाप के सर्व गुणों का अनुभव करने के लिए सदा ज्ञान सूर्य के सम्मुख रहो।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

अभी समय की बचत, संकल्पों की बचत, शक्ति के बचत की योजना बनाकर बिन्दी रूप की स्थिति को बढ़ाओ। जितना बिन्दी रूप की स्थिति होगी उतना कोई भी ईविल स्प्रिट वा ईविल संस्कार का फोर्स आप लोगों पर वार नहीं करेगा, आप भी उनसे मुक्त रहेंगे और आपका शक्तिरूप उन्हों को भी मुक्त करेगा।