20-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - पुण्य आत्मा
बनना है तो एक बाप को याद करो, याद से ही खाद निकलेगी, आत्मा पावन बनेगी''
प्रश्नः-
कौन सी स्मृति
रहे तो कभी भी किसी बात में मूँझ नहीं सकते?
उत्तर:-
ड्रामा की। बनी
बनाई बन रही, अब कुछ बननी नाहि... यह अनादि ड्रामा चलता ही रहता है। इसमें किसी बात
में मूँझने की दरकार नहीं। कई बच्चे कहते हैं पता नहीं यह हमारा अन्तिम 84 वाँ जन्म
है या नहीं, मूंझ जाते हैं। बाबा कहते मूंझो नहीं, मनुष्य से देवता बनने का
पुरुषार्थ करो।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) हर एक के निश्चित पार्ट को जान सदा निश्चिंत रहना है। बनी बनाई बन रही...
ड्रामा पर अडोल रहना है।
2) इस छोटे से संगमयुग पर बाप से पूरा वर्सा लेना है। याद के बल से खाद निकाल
स्वयं को कौड़ी से हीरे जैसा बनाना है। मीठे झाड के सैपलिंग में चलने के लिए लायक
बनना है।
वरदान:-
एक बाप की याद
में सदा मगन रह एकरस अवस्था बनाने वाले साक्षी दृष्टा भव
अभी ऐसे पेपर आने हैं जो
संकल्प, स्वप्न में भी नहीं होंगे। परन्तु आपकी प्रैक्टिस ऐसी होनी चाहिए जैसे हद
का ड्रामा साक्षी होकर देखा जाता है फिर चाहे दर्दनाक हो या हंसी का हो, अन्तर नहीं
होता। ऐसे चाहे कोई का रमणीक पार्ट हो, चाहे स्नेही आत्मा का गम्भीर पार्ट हो.....हर
पार्ट साक्षी दृष्टा होकर देखो, एकरस अवस्था हो। परन्तु ऐसी अवस्था तब रहेगी जब सदा
एक बाप की याद में मगन होंगे।
स्लोगन:-
दृढ़
निश्चय से अपने भाग्य को निश्चित कर दो तो सदा निश्चिंत रहेंगे।
ये अव्यक्त इशारे-
“निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
कर्म करने के पहले
यह निश्चय रखो कि विजय तो हमारी हुई पड़ी है। अनेक कल्प विजयी बने हैं। जब अनेक
कल्प, अनेक बार विजयी बन विजय माला में पिरोने वाले, पूजन होने वाले बने हैं तो अब
वही रिपीट करना है। बना हुआ कर्म दुबारा रिपीट करना है इसलिए कहा जाता है कि बना
बनाया....। बना हुआ है लेकिन अब फिर से रिपीट कर ‘बना बनाया' जो कहावत है उसको पूरा
करना है।