20-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - श्रीमत पर
चल सबको मुक्ति-जीवनमुक्ति पाने का रास्ता बताओ, सारा दिन यही धन्धा करते रहो''
प्रश्नः-
बाप ने कौन-सी
सूक्ष्म बातें सुनाई हैं जो बहुत समझने की हैं?
उत्तर:-
सतयुग अमरलोक
है, वहाँ आत्मा एक चोला बदल दूसरा लेती है लेकिन मृत्यु का नाम नहीं इसलिए उसे
मृत्युलोक नहीं कहा जाता। 2. शिवबाबा की बेहद रचना है, ब्रह्मा की रचना इस समय
सिर्फ तुम ब्राह्मण हो। त्रिमूर्ति शिव कहेंगे, त्रिमूर्ति ब्रह्मा नहीं। यह सब
बहुत सूक्ष्म बातें बाप ने सुनाई हैं। ऐसी-ऐसी बातों पर विचार कर बुद्धि के लिए
स्वयं ही भोजन तैयार करना है।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) हम ब्रह्मा की नई रचना आपस में भाई-बहन हैं, यह अन्दर समझना है किसी
को कहने की दरकार नहीं। सदा इसी खुशी में रहना है कि हमें शिवबाबा पढ़ाते हैं।
2) खान-पान के हंगामें में जास्ती नहीं जाना है। हबच (लालच) छोड़ बेहद बादशाही
के सुखों को याद करना है।
वरदान:-
अनेक प्रकार
की प्रवृत्ति से निवृत्त होने वाले नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप भव
स्व की प्रवृत्ति, दैवी
परिवार की प्रवृत्ति, सेवा की प्रवृत्ति, हद के प्राप्तियों की प्रवृत्ति इन सभी से
नष्टोमोहा अर्थात् न्यारा बनने के लिए बापदादा के स्नेह रूप को सामने रख स्मृति
स्वरूप बनो। स्मृति स्वरूप बनने से नष्टोमोहा स्वत: बन जायेंगे। प्रवृत्ति से
निवृत्त होना अर्थात् मैं पन को समाप्त कर नष्टोमोहा बनना। ऐसे नष्टोमोहा बनने वाले
बच्चे बहुतकाल के पुरुषार्थ से बहुतकाल के प्रालब्ध की प्राप्ति के अधिकारी बनेंगे।
स्लोगन:-
मल फूल
समान न्यारे रहो तो प्रभू का प्यार मिलता रहेगा।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
जो नम्बरवन परवाने
हैं उनको स्वयं का अर्थात् इस देह-भान का, दिन-रात का, भूख और प्यास का, अपने सुख
के साधनों का, आराम का, किसी भी बात का आधार नहीं। वे सब प्रकार की देह की स्मृति
से खोये हुए अर्थात् निरन्तर शमा के लव में लवलीन रहते हैं। जैसे शमा ज्योति-स्वरुप
है, लाइट माइट रूप है, वैसे शमा के समान स्वयं भी लाइट-माइट रूप बन जाते हैं।