20-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप आये हैं
तुम बच्चों को शान्ति और सुख का वर्सा देने, तुम्हारा स्वधर्म ही शान्त है, इसलिए
तुम शान्ति के लिए भटकते नहीं हो।''
प्रश्नः-
अभी तुम बच्चे
21 जन्मों के लिए अखुट खजानों में वज़न करने योग्य बनते हो - क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि बाप
जब नई सृष्टि रचते हैं, तब तुम बच्चे उनके मददगार बनते हो। अपना सब कुछ उनके कार्य
में सफल करते हो इसलिए बाप उसके रिटर्न में 21 जन्मों के लिए तुम्हें अखुट खजानों
में ऐसा वज़न करते हैं जो कभी धन भी नहीं खुटता, दु:ख भी नहीं आता, अकाले मृत्यु भी
नहीं होती।
गीत:-
मुझको सहारा
देने वाले......
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इन आंखों से शरीर सहित जो दिखाई देता है, यह सब भस्म हो जाना है
इसलिए अपना सब कुछ सफल करना है।
2) बाप से पूरा वर्सा लेने के लिए पढ़ाई पढ़नी है। सदा अपने लक को स्मृति में रख
ब्रह्माण्ड वा विश्व का मालिक बनना है।
वरदान:-
वाह ड्रामा
वाह की स्मृति से अनेकों की सेवा करने वाले सदा खुशनुम:भव
इस ड्रामा की कोई भी सीन
देखते हुए वाह ड्रामा वाह की स्मृति रहे तो कभी भी घबरायेंगे नहीं क्योंकि ड्रामा
का ज्ञान मिला कि वर्तमान समय कल्याणकारी युग है, इसमें जो भी दृश्य सामने आता है
उसमें कल्याण भरा हुआ है। वर्तमान में कल्याण दिखाई न भी दे लेकिन भविष्य में समाया
हुआ कल्याण प्रत्यक्ष हो जायेगा - तो वाह ड्रामा वाह की स्मृति से सदा खुशनुम:रहेंगे,
पुरुषार्थ में कभी भी उदासी नहीं आयेगी। स्वत: ही आप द्वारा अनेको की सेवा होती
रहेगी।
स्लोगन:-
शान्ति
की शक्ति ही मन्सा सेवा का सहज साधन है। जहाँ शान्ति की शक्ति है वहाँ सन्तुष्टता
है।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
जितना अव्यक्त
लाइट रूप में स्थित होंगे, उतना शरीर से परे का अभ्यास होने के कारण यदि दो-चार
मिनट भी अशरीरी बन जायेंगे, तो मानों जैसेकि चार घण्टे का आराम कर लिया। ऐसा समय
आयेगा जो नींद के बजाए चार-पाँच मिनट अशरीरी बन जायेंगे और शरीर को आराम मिल जायेगा।
लाइट स्वरूप के स्मृति को मजबूत करने से हिसाब-किताब चुक्त करने में भी लाइट रुप हो
जायेंगे।