21-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम बाप के पास आये हो अपनी सोई हुई तकदीर जगाने, तकदीर जगना माना विश्व का मालिक बनना''

प्रश्नः-
कौन सी खुराक तुम बच्चों को बाप समान बुद्धिवान बना देती है?

उत्तर:-
यह पढ़ाई है तुम बच्चों के बुद्धि की खुराक। जो रोज़ पढ़ाई पढ़ते हैं अर्थात् इस खुराक को लेते हैं उनकी बुद्धि पारस बन जाती है। पारसनाथ बाप जो बुद्धिवानों की बुद्धि है वह तुम्हें आपसमान पारसबुद्धि बनाते हैं।

गीत:-
तकदीर जगाकर आई हूँ........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप से सुख का वर्सा लेकर सुख का देवता बनना है। सबको सुख देना है। राजऋषि बनने के लिए सर्व विकारों का संन्यास करना है।

2) पढ़ाई ही सच्ची खुराक है। सद्गति के लिए सुनी-सुनाई बातों को छोड़ श्रीमत पर चलना है। एक बाप से ही सुनना है। मोहजीत बनना है।

वरदान:-
अपने असली संस्कारों को इमर्ज कर सदा हर्षित रहने वाले ज्ञान स्वरूप भव

जो बच्चे ज्ञान का सिमरण कर उसका स्वरूप बनते हैं वह सदा हर्षित रहते हैं। सदा हर्षित रहना - यह ब्राह्मण जीवन का असली संस्कार है। दिव्य गुण अपनी चीज़ है, अवगुण माया की चीज़ है जो संगदोष से आ गये हैं। अब उसे पीठ दे दो और अपने आलमाइटी अथॉरिटी की पोजीशन पर रहो तो सदा हर्षित रहेंगे। कोई भी आसुरी वा व्यर्थ संस्कार सामने आने की हिम्मत भी नहीं रख सकेंगे।

स्लोगन:-
सम्पूर्णता का लक्ष्य सामने रखो तो संकल्प में भी कोई आकर्षण आकर्षित नहीं कर सकती।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

एकता के लिए एक रूहानी तावीज़ सदा अपने पास रखना कि रिगार्ड देना ही रिगार्ड लेना है। यह रिगार्ड का रिकार्ड सफलता का अविनाशी रिकार्ड हो जायेगा। मुख पर एक ही सफलता का मन्त्र हो - “पहले आप'' - यह महामन्त्र मन से पक्का रहे। यथार्थ रूप से पहले मैं को मिटाकर दूसरे को आगे बढ़ाना सो अपना बढ़ना समझते हुए इस महामन्त्र को आगे बढ़ाते सफलता को पाते रहो, यह मन्त्र और तावीज़ सदा साथ रहे तो प्रत्यक्षता का नगाड़ा बज जायेगा।