21-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम आसुरी
मत पर चलने से दरबदर हो गये, अब ईश्वरीय मत पर चलो तो सुखधाम चले जायेंगे''
प्रश्नः-
बच्चों को बाप
से कौन सी उम्मीद रखनी है, कौन सी नहीं?
उत्तर:-
बाप से यही
उम्मीद रखनी है कि हम बाप द्वारा पवित्र बन अपने घर और घाट (राजधानी) में जायें।
बाबा कहते हैं - बच्चे, मेरे में यह उम्मीद नहीं रखो कि फलाना बीमार है, आशीर्वाद
मिले। यहाँ कृपा या आशीर्वाद की बात ही नहीं है। मैं तो आया हूँ तुम बच्चों को पतित
से पावन बनाने। अब मैं तुमको ऐसे कर्म सिखलाता हूँ जो विकर्म न बनें।
गीत:-
आज नहीं तो कल
बिखरेंगे यह बादल........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) श्रीमत पर अब हर कर्म श्रेष्ठ करना है, किसी को भी दु:ख नहीं देना
है, दैवीगुण धारण करने हैं। बाप के डायरेक्शन पर ही चलना है।
2) सदैव हर्षित रहने के लिए स्वदर्शन चक्रधारी बनना है, कभी लूनपानी नहीं होना
है। सबको बाप का परिचय देना है। बहुत-बहुत मीठा बनना है।
वरदान:-
मान मांगने के
बजाए सबको मान देने वाले, सदा निष्काम योगी भव
आपको कोई मान दे, माने वा
न माने लेकिन आप उसको मीठा भाई, मीठी बहन मानते हुए सदा स्वमान में रह, स्नेही
दृष्टि से, स्नेह की वृत्ति से आत्मिक मान देते चलो। यह मान देवे तो मैं मान दूँ-यह
भी रॉयल भिखारीपन है, इसमें निष्काम योगी बनो। रूहानी स्नेह की वर्षा से दुश्मन को
भी दोस्त बना दो। आपके सामने कोई पत्थर भी फेकें तो भी आप उसे रत्न दो क्योंकि आप
रत्नागर बाप के बच्चे हो।
स्लोगन:-
विश्व
का नव-निर्माण करने के लिए दो शब्द याद रखो - निमित्त और निर्मान।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
सेवा में सफलता का
मुख्य साधन है - त्याग और तपस्या। ऐसे त्यागी और तपस्वी अर्थात् सदा बाप की लग्न
में लवलीन, प्रेम के सागर में समाए हुए, ज्ञान, आनन्द, सुख, शान्ति के सागर में
समाये हुए को ही कहेंगे - तपस्वी। ऐसे त्याग तपस्या वाले ही सच्चे सेवाधारी हैं।