21-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम अभी
गॉडली सर्विस पर हो, तुम्हें सबको सुख का रास्ता बताना है, स्कालरशिप लेने का
पुरुषार्थ करना है''
प्रश्नः-
तुम बच्चों की
बुद्धि में जब ज्ञान की अच्छी धारणा हो जाती है तो कौन-सा डर निकल जाता है?
उत्तर:-
भक्ति में जो
डर रहता कि गुरू हमें श्राप न दे देवे, यह डर ज्ञान में आने से, ज्ञान की धारणा करने
से निकल जाता है क्योंकि ज्ञान मार्ग में श्राप कोई दे न सके। रावण श्राप देता है,
बाप वर्सा देते हैं। रिद्धि-सिद्धि सीखने वाले ऐसा तंग करने का, दु:ख देने का काम
करते हैं, ज्ञान में तो तुम बच्चे सबको सुख पहुँचाते हो।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप से बेहद का वर्सा लेने के लिए डायरेक्ट अपना तन-मन-धन ईश्वर के
आगे अर्पण करने में समझदार बनना है। अपना सब कुछ 21 जन्मों के लिए ट्रांसफर कर लेना
है।
2) जैसे बाप पढ़ाने की, सम्भालने की और श्रृंगारने की सर्विस करते हैं, ऐसे बाप
समान सर्विस करनी है। जीवन बन्ध से निकाल सबको जीवन मुक्ति में ले जाना है।
वरदान:-
ज्ञान कलष
धारण कर प्यासों की प्यास बुझाने वाले अमृत कलषधारी भव
अभी मैजारिटी आत्मायें
प्रकृति के अल्पकाल के साधनों से, आत्मिक शान्ति प्राप्त करने के लिए बने हुए
अल्पज्ञ स्थानों से, परमात्म मिलन मनाने के ठेकेदारों से थक गये हैं, निराश हो गये
हैं, समझते हैं सत्य कुछ और है, प्राप्ति के प्यासे हैं। ऐसी प्यासी आत्माओं को
आत्मिक परिचय, परमात्म परिचय की यथार्थ बूँद भी तृप्त आत्मा बना देगी इसलिए ज्ञान
कलष धारण कर प्यासों की प्यास बुझाओ। अमृत कलष सदा साथ रहे। अमर बनो और अमर बनाओ।
स्लोगन:-
एडॅजेस्ट होने की कला को लक्ष्य बना लो तो सहज सम्पूर्ण बन जायेंगे।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
अशरीरी बनने के
लिए समेटने की शक्ति बहुत आवश्यक है। अपने देह-अभिमान के संकल्प को, देह के दुनिया
की परिस्थितियों के संकल्प को समेटना है। घर जाने के संकल्प के सिवाय अन्य किसी
संकल्प का विस्तार न हो - बस यही संकल्प हो कि अब अपने घर गया कि गया। अनुभव करो कि
मैं आत्मा इस आकाश तत्व से भी पार उड़ती हुई जा रही हूँ, इसके लिये अब से अकाल
तख्तनशीन होने का अभ्यास बढ़ाओ।