22-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - पढ़ाई और
दैवी कैरेक्टर्स का रजिस्टर रखो, रोज़ चेक करो कि हमसे कोई भूल तो नहीं हुई''
प्रश्नः-
तुम बच्चे किस
पुरुषार्थ से राजाई का तिलक प्राप्त कर सकते हो?
उत्तर:-
1. सदा
आज्ञाकारी रहने का पुरुषार्थ करो। संगम पर फ़रमानबरदार का टीका दो तो राजाई का तिलक
मिल जायेगा। बेव़फादार अर्थात् आज्ञा को न मानने वाले राजाई का तिलक नहीं प्राप्त
कर सकते। 2. कोई भी बीमारी सर्जन से छिपाओ नहीं। छिपायेंगे तो पद कम हो जायेगा। बाप
जैसा प्यार का सागर बनो तो राजाई का तिलक मिल जायेगा।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) श्रीमत पर चल अपनी बुद्धि सालिम (अच्छी) रखनी है। कोई भी अवज्ञा नहीं
करनी है। क्रोध में आकर मुख से बाम नहीं निकालना है, चुप रहना है।
2) दिल से एक बाप की महिमा करनी है। इस पुरानी दुनिया से आसक्ति वा प्यार नहीं
रखना है। बेहद का वैरागी और निर्मोही बनना है।
वरदान:-
याद के आधार
द्वारा माया की कीचड़ से परे रहने वाले सदा चियरफुल भव
कोई कैसी भी बात सामने आये
सिर्फ बाप के ऊपर छोड़ दो। जिगर से कहो - ठबाबा''। तो बात खत्म हो जायेगी। यह बाबा
शब्द दिल से कहना ही जादू है। माया पहले-पहले बाप को ही भुलाती है इसलिए सिर्फ इस
बात पर अटेन्शन दो तो कमल पुष्प के समान अपने को अनुभव करेंगे। याद के आधार पर माया
के समस्याओं की कीचड़ से सदा परे रहेंगे। कभी किसी भी बात में हलचल में नहीं आयेंगे,
सदा एक ही मूड होगी चियरफुल।
स्लोगन:-
पवित्रता की धारणा वा धर्म को जीवन में लाने वाले ही महान आत्मा हैं।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
स्वयं को बन्धनों
से मुक्त करने के लिए अपनी चलन को और जो कड़ा संस्कार है उसे चेन्ज करो। बंधन डालने
वाले अपना काम करें, आप अपना काम करो। उनके काम को देख घबराओ नहीं। जितना वो अपना
काम फोर्स से कर रहे हैं, आप अपना फोर्स से करो। उनके गुण उठाओ कि वह कैसे अपना
कर्तव्य कर रहे हैं, आप भी करो। अपने को बन्धनों से मुक्त करने की युक्ति रचो।