22-02-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 05.02.2009 "बापदादा"    मधुबन


सेवा करते डबल लाइट स्थिति द्वारा फरिश्तेपन की अवस्था में रहो, अशरीरी बनने का अभ्यास करो


वरदान:-
साकार और निराकार बाप के साथ द्वारा हर संकल्प में विजयी बनने वाले सदा सफलमूर्त भव

जैसे निराकार आत्मा और साकार शरीर दोनों के सम्बन्ध से हर कार्य कर सकते हो, ऐसे ही निराकार और साकार बाप दोनों को साथ वा सामने रखते हुए हर कर्म वा संकल्प करो तो सफलमूर्त बन जायेंगे क्योंकि जब बापदादा सम्मुख हैं तो जरूर उनसे वेरीफाय करा करके निश्चय और निर्भयता से करेंगे। इससे समय और संकल्प की बचत होगी। कुछ भी व्यर्थ नहीं जायेगा, हर कर्म स्वत: सफल होगा।

स्लोगन:-
रूहानी स्नेह सम्पत्ति से भी अधिक मूल्यवान है इसलिए मास्टर स्नेह के सागर बनो।

ये अव्यक्त इशारे-एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

धर्म सत्ता वालों के सामने पवित्रता की शक्ति और राज्य सत्ता वालों के आगे एकता की शक्ति को सिद्ध करो। इन दोनों ही शक्तियों को सिद्ध करने से ईश्वरीय सत्ता का झण्डा बहुत सहज लहरा जायेगा। अभी इन दोनों की तरफ विशेष अटेन्शन चाहिए। जितना-जितना प्युरिटी और युनिटी की शक्ति से उन्हों के समीप सम्पर्क में आते रहेंगे उतना वह स्वयं ही अपना वर्णन करने लगेंगे।