22-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - चैरिटी बिगेन्स एट होम अर्थात् जो देवी देवता धर्म के हैं, शिव के वा देवताओं के पुजारी हैं, उन्हें पहले-पहले ज्ञान दो''

प्रश्नः-
बाप का कौन सा कर्तव्य कोई भी मनुष्य नहीं कर सकते हैं और क्यों?

उत्तर:-
सारे विश्व में शान्ति स्थापन करने का कर्तव्य एक बाप का है। मनुष्य, विश्व में शान्ति स्थापन नहीं कर सकते क्योंकि सब विकारी हैं। शान्ति की स्थापना तब हो जब बाप को जानें और पवित्र बनें। बाप को न जानने के कारण निधनके बन गये हैं।

गीत:-
मरना तेरी गली में....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) एक बाप से सच्ची प्रीत रख सच्चा-सच्चा पाण्डव बनना है। मौत सामने खड़ा है इसलिए पवित्र बन पवित्र दुनिया का मालिक बनना है।

2) काम महाशत्रु जो आदि-मध्य-अन्त दु:ख देता है, उस पर जीत प्राप्त कर पावन बनना है, याद से विकारों की खाद निकाल आत्मा को गोल्डन एजड बनाना है।

वरदान:-
मरजीवे जन्म की स्मृति द्वारा कर्मबन्धन को सम्बन्ध में परिवर्तन करने वाले परोपकारी भव

लौकिक कर्मबन्धन का सम्बन्ध अब मरजीवे जन्म के कारण श्रीमत के आधार पर सेवा के सम्बन्ध का आधार है। कर्मबन्धन नहीं सेवा का सम्बन्ध है। सेवा के सम्बन्ध में वैराइटी प्रकार की आत्माओं का ज्ञान धारण कर चलेंगे तो बंधन में तंग नहीं होंगे। लेकिन अति पाप आत्मा, अपकारी आत्मा से भी नफरत वा घृणा के बजाए, रहमदिल बन तरस की भावना रखते हुए, सेवा का सम्बन्ध समझकर सेवा करेंगे तो नामीग्रामी विश्व कल्याणी वा परोपकारी गाये जायेंगे।

स्लोगन:-
समय वा परिस्थिति प्रमाण वैराग्य आया तो यह भी अल्पकाल का वैराग्य है, सदाकाल के वैरागी बनो।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

किसी भी प्रकार का विघ्न व समस्या अथवा माया का वार, वार नहीं है लेकिन खेल के समान अनुभव हो तो खेल समझने से खुशी-खुशी पार कर लेंगे और अवस्था एकरस रहेगी। लेकिन अगर इसे वार समझेंगे तो घबरायेंगे भी और हलचल में भी आ जायेंगे। माया का काम है आना और आपका काम है विजयी बनना।