22-11-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - सबको यह खुशखबरी सुनाओ कि अब डीटी डिनायस्टी स्थापन हो रही है, जब वाइसलेस वर्ल्ड होगी तब बाकी सब विनाश हो जायेंगे''

प्रश्नः-
रावण का श्राप कब मिलता है, श्रापित होने की निशानी क्या है?

उत्तर:-
जब तुम देह-अभिमानी बनते हो तब रावण का श्राप मिल जाता है। श्रापित आत्मायें कंगाल विकारी बनती जाती हैं, नीचे उतरती जाती हैं। अब बाप से वर्सा लेने के लिए देही-अभिमानी बनना है। अपनी दृष्टि-वृत्ति को पावन बनाना है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पतित से पावन बनने के पुरुषार्थ में सुस्ती नहीं करनी है। कोई भी मित्र सम्बन्धी आदि हैं उन पर तरस रख समझाना है, छोड़ नहीं देना है।

2) ऐसी चलन नहीं रखनी है जो कोई कहे कि इन्होंने तो मुँह मोड़ लिया है। रहमदिल बन सबका कल्याण करना है और सब ख्यालात छोड़ एक बाप की याद में रहना है।

वरदान:-
सत्यता, स्वच्छता और निर्भयता के आधार से प्रत्यक्षता करने वाले रमता योगी भव

परमात्म प्रत्यक्षता का आधार सत्यता है और सत्यता का आधार स्वच्छता वा निर्भयता है। यदि किसी भी प्रकार की अस्वच्छता अर्थात् सच्चाई सफाई की कमी है, या अपने ही तमोगुणी संस्कारों पर विजयी बनने में, संस्कार मिलाने में या विश्व सेवा के क्षेत्र में अपने सिद्धान्तों को सिद्ध करने में भय है तो प्रत्यक्षता नहीं हो सकती इसलिए सत्यता और निर्भयता को धारण कर एक ही धुन में मस्त रहने वाले रमता योगी, सहज राजयोगी बनो तो सहज ही अन्तिम प्रत्यक्षता होगी।

स्लोगन:-
बेहद की दृष्टि, वृत्ति ही युनिटी का आधार है इसलिए हद में नहीं आओ।

अव्यक्त इशारे - अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ

अशरीरी बनना वायरलेस सेट है। वाइसलेस बनना ही वायरलेस सेट की सेटिंग है। जरा भी अंश के भी अंशमात्र विकार वायरलेस के सेट को बेकार कर देगा इसलिए अब कर्मबन्धनी से कर्मयोगी बनो। अनेक बन्धनों से मुक्त एक बाप के सम्बन्ध में समझो तो सदा एवररेडी रहेंगे। चेक करो - अन्दर कोई भी विकार छिपा हुआ तो नहीं है?