23-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हारे मुख से सदैव ज्ञान रत्न निकलने चाहिए, तुम्हारा मुखड़ा सदैव हर्षित रहना चाहिए''

प्रश्नः-
जिन बच्चों ने ब्राह्मण जीवन में ज्ञान की धारणा की है उनकी निशानी क्या होगी?

उत्तर:-
1- उनकी चलन देवताओं मिसल होगी, उनमें दैवीगुणों की धारणा होगी। 2- उन्हें ज्ञान का विचार सागर मंथन करने का अभ्यास होगा। वे कभी आसुरी बातों का अर्थात् किचड़े का मंथन नहीं करेंगे। 3- उनके जीवन से गाली देना और ग्लानी करना बन्द हो जाता है। 4- उनका मुखड़ा सदा हर्षित रहता है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपने हर्षितमुख मुखड़े से बाप का नाम बाला करना है। ज्ञान रत्न ही सुनने और सुनाने हैं। गले में ज्ञान रत्नों की माला पड़ी रहे। आसुरी अवगुणों को निकाल देना है।

2) सर्विस में कभी थकना नहीं है। उम्मीद रख शौक से सर्विस करनी है। विचार सागर मंथन कर उल्लास में रहना है।

वरदान:-
कनफ्यूज़ होने के बजाए लूज़ कनेक्शन को ठीक करने वाले समस्या मुक्त भव

सभी समस्याओं का मूल कारण कनेक्शन लूज़ होना है। सिर्फ कनेक्शन को ठीक कर दो तो सर्व शक्तियां आपके आगे घूमेंगी। यदि कनेक्शन जोड़ने में एक दो मिनट लग भी जाते हैं तो हिम्मत हारकर कनफ्यूज न हो जाओ। निश्चय के फाउन्डेशन को हिलाओ नहीं। मैं बाबा का, बाबा मेरा - इस आधार से फाउण्डेशन को पक्का करो तो समस्या मुक्त बन जायेंगे।

स्लोगन:-
बीजरूप अवस्था में स्थित रहना - यही पुराने संस्कारों को परिवर्तन करने की विधि है।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

जब सेवा में वा अपने पुराने संस्कारों को परिवर्तन करने में सफलता नहीं मिलती है तो कोई न कोई विघ्न के वश हो जाते हो। फिर उनसे मुक्त होने की इच्छा रखते हो, लेकिन बिना शक्ति के यह इच्छा पूर्ण नहीं हो सकती इसलिए अंलकारी रूप बनो। शक्तिरूप धारण करो तो बंधनमुक्त बन जायेंगे।