23-03-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - चुप रहना भी बहुत बड़ा गुण है, तुम चुप रहकर बाप को याद करते रहो तो बहुत कमाई जमा कर लेंगे''

प्रश्नः-
कौन से बोल कर्म संन्यास को सिद्ध करते हैं, वह बोल तुम नहीं बोल सकते?

उत्तर:-
ड्रामा में होगा तो कर लेंगे, बाबा कहते यह तो कर्म संन्यास हो गया। तुम्हें कर्म तो अवश्य करना है। बिना पुरुषार्थ के तो पानी भी नहीं मिल सकता, इसलिए ड्रामा कहकर छोड़ नहीं देना है। नई राजधानी में ऊंच पद पाना है तो खूब पुरुषार्थ करो।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) किसी देहधारी के नाम रूप में नहीं फंसना है। एक बाप की श्रीमत पर चलकर सद्गति को पाना है। चुप रहना है।

2) भविष्य 21 जन्मों के लिए अच्छी रीति पढ़ना और दूसरों को पढ़ाना है। पढ़ने और पढ़ाने से ही नाम बाला होगा।

वरदान:-
मनमत, परमत को समाप्त कर श्रीमत पर पदमों की कमाई जमा करने वाले पदमापदम भाग्यशाली भव

श्रीमत पर चलने वाले एक संकल्प भी मनमत वा परमत पर नहीं कर सकते। स्थिति की स्पीड यदि तेज नहीं होती है तो जरूर कुछ न कुछ श्रीमत में मनमत वा परमत मिक्स है। मनमत अर्थात् अल्पज्ञ आत्मा के संस्कार अनुसार जो संकल्प उत्पन्न होता है वह स्थिति को डगमग करता है इसलिए चेक करो और कराओ, एक कदम भी श्रीमत के बिना न हो तब पदमों की कमाई जमा कर पदमापदम भाग्यशाली बन सकेंगे।

स्लोगन:-
मन में सर्व के कल्याण की भावना बनी रहे - यही विश्व कल्याणकारी आत्मा का कर्तव्य है।

ये अव्यक्त इशारे- “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"

सरकमस्टांस भले कैसे भी हों लेकिन निश्चयबुद्धि बच्चे सरकमस्टांस में अपनी स्वस्थिति की शक्ति से सदा विजयी अनुभव करेंगे। चाहे दुनिया वाले लोग वा ब्राह्मण परिवार के सम्बन्ध-सम्पर्क में दूसरा समझे वा कहे कि यह हार गया - लेकिन वह हार नहीं है, जीत है। कोई भी सेवा की, संगठन की, प्रकृति की परिस्थिति स्वस्थिति को वा श्रेष्ठ स्थिति को डगमग करती है तो यह भी बन्धनमुक्त स्थिति नहीं है। इस बन्धन से भी मुक्त बनो।