23-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - रावण ने
तुम्हें बहुत पीड़ित किया है, अभी तुम भक्तों का रक्षक भगवान आया है तुम्हारी पीड़ा
को दूर करने''
प्रश्नः-
सपूत बच्चों
की मुख्य दो निशानियाँ सुनाओ?
उत्तर:-
सपूत बच्चे सदा
मात-पिता को फालो कर तख्तनशीन बनेंगे। खूब पुरुषार्थ में लगे रहेंगे। 2- उनकी बाप
से दिल बहुत सच्ची होगी। सच्ची दिल वाले सदा श्रीमत पर चलेंगे। अगर अन्दर में
सच्चाई नहीं तो याद में रह नहीं सकते।
गीत:-
भोलेनाथ से
निराला...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) आत्मा में जो तमोप्रधानता के संस्कार हैं, उन्हें याद के बल से चेंज
करना है। सतोप्रधान बनना है।
2) बाप से राजाई का वर्सा लेने के लिए सदा सपूत बच्चा बन श्रीमत पर चलना है।
सच्चे बाप से सच्चा रहना है। मात-पिता को पूरा फालो करना है। ज्ञान रत्नों का दान
करते रहना है।
वरदान:-
अपने परिवर्तन
द्वारा निरन्तर विजय की अनुभूति करने वाले सच्चे सेवाधारी भव
जैसे निरन्तर योगी बने हो
ऐसे निरन्तर विजयी बनो तो सच्चे सेवाधारी बन जायेंगे क्योंकि विजयी आत्मा, जब हर
संकल्प, हर कदम में विजय का अनुभव करती है तो उनका यह परिवर्तन देख अनेक आत्माओं की
सेवा स्वत: होती है। उनके नैन रूहानियत का अनुभव कराते हैं, चलन बाप के चरित्रों का
साक्षात्कार कराती है, मस्तक से मस्तकमणि का साक्षात्कार होता है। ऐसे अपनी अव्यक्त
सूरत से सेवा करने वाली विशेष आत्मा को ही सच्चा सेवाधारी कहा जाता है।
स्लोगन:-
विशेषतायें वा गुण दाता की देन हैं, दाता को देखो व्यक्ति को नहीं।
ये अव्यक्त इशारे
- सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
आत्मिक स्थिति के
अभ्यास से वायुमण्डल को रूहानी बनाओ तो और सब बातें स्वत: ठीक हो जायेंगी, सब एकमत
और एकरस हो जायेंगे फिर माया भी नहीं आयेगी क्योंकि वायुमण्डल शक्तिशाली होगा।
वायुमण्डल को शक्तिशाली बनाने के लिए याद के प्रोग्राम रखो और आपस में उन्नति के
लिए रुह-रुहान की क्लासेज़ करो, स्नेह मिलन करो। धारणा की क्लासेज़ रखो तो सफलता
मिल जायेगी।