23-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप आये हैं
तुम्हारा ज्ञान रत्नों से श्रृंगार कर वापस घर ले जाने, फिर राजाई में भेज देंगे तो
अपार खुशी में रहो, एक बाप से ही प्यार करो''
प्रश्नः-
अपनी धारणा को
मजबूत (पक्का) बनाने का आधार क्या है?
उत्तर:-
अपनी धारणा को
मजबूत बनाने के लिए सदैव यह पक्का करो कि आज के दिन जो पास हुआ अच्छा हुआ फिर कल्प
के बाद होगा। जो कुछ हुआ कल्प पहले भी ऐसे हुआ था, नथिंग न्यु। यह लड़ाई भी 5 हज़ार
वर्ष पहले लगी थी, फिर लगेगी जरूर। इस भंभोर का विनाश होना ही है...... ऐसे हर पल
ड्रामा की स्मृति में रहो तो धारणा मजबूत होती जाये।
गीत:-
दूरदेश का रहने
वाला.........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अभी हर कर्म ज्ञानयुक्त करना है, पात्र को ही दान देना है। पाप
आत्माओं से अब कोई पैसे आदि की लेन-देन नहीं करनी है। योगबल से सब पुराने
हिसाब-किताब चुक्तू करने हैं।
2) अपार खुशी में रहने के लिए अपने आपसे बातें करनी है - बाबा, आप आये हैं हमें
अपार खुशी का खज़ाना देने, आप हमारी झोली भर रहे हैं, आपके साथ पहले हम शान्तिधाम
जायेंगे फिर अपनी राजधानी में आयेंगे.......।
वरदान:-
समस्याओं को
समाधान रूप में परिवर्तित करने वाले विश्व कल्याणी भव
मैं विश्व कल्याणी हूँ -
अब इस श्रेष्ठ भावना, श्रेष्ठ कामना के संस्कार इमर्ज करो। इस श्रेष्ठ संस्कार के
आगे हद के संस्कार स्वत: समाप्त हो जायेंगे। समस्यायें समाधान के रूप में परिवर्तित
हो जायेंगी। अब युद्ध में समय नहीं गंवाओ लेकिन विजयीपन के संस्कार इमर्ज करो। अब
सब कुछ सेवा में लगा दो तो मेहनत से छूट जायेंगे। समस्याओं में जाने के बजाए दान
दो, वरदान दो तो स्व का ग्रहण स्वत:समाप्त हो जायेगा।
स्लोगन:-
किसी
की कमी, कमजोरियों का वर्णन करने के बजाए गुण स्वरूप बनो, गुणों का ही वर्णन करो।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
बाप का बच्चों से
इतना प्यार है जो अमृतवेले से ही बच्चों की पालना करते हैं। दिन का आरम्भ ही कितना
श्रेष्ठ होता है! स्वयं भगवन मिलन मनाने के लिये बुलाते हैं, रुहरिहान करते हैं,
शक्तियाँ भरते हैं! बाप की मोहब्बत के गीत आपको उठाते हैं। कितना स्नेह से बुलाते
हैं, उठाते हैं - मीठे बच्चे, प्यारे बच्चे, आओ.....। तो इस प्यार की पालना का
प्रैक्टिकल स्वरूप है ‘सहज योगी जीवन'।