23-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम रूहानी बाप से नई-नई रूहानी बातें सुन
रहे हो, तुम जानते हो जैसे हम आत्मायें अपना रूप बदलकर आये हैं, वैसे बाप भी आये
हैं''
प्रश्नः-
छोटे-छोटे
बच्चे बाप की समझानी पर अच्छी रीति ध्यान दें, तो कौन सा टाइटल ले सकते हैं?
उत्तर:-
स्प्रीचुअल
लीडर का। छोटे बच्चे अगर कोई हिम्मत का काम करके दिखायें, बाप से जो सुनते हैं उस
पर ध्यान दें और दूसरों को समझायें तो उन्हें सब बहुत प्यार करेंगे। बाप का नाम भी
बाला हो जायेगा।
गीत:-
छोड़ भी दे
आकाश सिंहासन....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
इस पुरानी छी-छी गोबर मिसल दुनिया को बुद्धि से भूल सतयुगी दुनिया को याद कर अपार
खुशी व नशे में रहना है। कभी भी रोना नहीं है।
2) बाप जो गुह्य
रमणीक बातें सुनाते हैं उन्हें धारण कर सबको समझाना है। स्प्रीचुअल लीडर का टाइटल
लेना है।
वरदान:-
स्वमान में
स्थित रह देह-अभिमान को समाप्त करने वाले सफलतामूर्त भव
जो बच्चे स्वमान में
स्थित रहते हैं वही बाप के हर फरमान का सहज ही पालन कर सकते हैं। स्वमान
भिन्न-भिन्न प्रकार के देह-अभिमान को समाप्त कर देता है। लेकिन जब स्वमान से स्व
शब्द भूल जाता है और मान-शान में आ जाते हो तो एक शब्द की गलती से अनेक गलतियां होने
लगती हैं इसलिए मेहनत ज्यादा और प्रत्यक्षफल कम मिलता है। लेकिन सदा स्वमान में
स्थित रहो तो पुरषार्थ वा सेवा में सहज ही सफलता-मूर्त बन जायेंगे।
स्लोगन:-
तपस्या करनी
है तो समय को बचाओ, बहाना नहीं दो।
ये अव्यक्त इशारे -
अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
जितना दाता बनते हो
उतना भरता जाता है। भण्डारा भरपूर है तो क्यों नहीं दाता बनो, इसको ही कहा जाता है
निरन्तर रूहानी सेवाधारी। विश्व महाराजन् बनने के लिए सिर्फ ज्ञान दाता नहीं बनना
है। इसके लिए स्नेह और सहयोग भी देना है। अगर यह हाई जम्प दे दिया तो सभी बातों में
श्रेष्ठ सहज ही बन जायेंगे।