23-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 31.12.2007 "बापदादा" मधुबन
नये वर्ष में अखण्ड
महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना
वरदान:-
ग्लानी करने
वाले को भी गुणमाला पहनाने वाले इष्ट देव, महान आत्मा भव
जैसे आजकल आप विशेष
आत्माओं का स्वागत करते समय कोई गले में स्थूल माला डालते हैं तो आप डालने वाले के
गले में रिटर्न कर देते हो, ऐसे ग्लानि करने वाले को भी आप गुणमाला पहनाओ तो वह
स्वत: ही आपको गुणमाला रिटर्न करेंगे क्योंकि ग्लानि करने वाले को गुणमाला पहनाना
अर्थात् जन्म-जन्म के लिए भक्त निश्चित कर देना है। यह देना ही अनेक बार का लेना हो
जाता है। यही विशेषता इष्ट देव, महान आत्मा बना देती है।
स्लोगन:-
अपनी मन्सा वृत्ति सदा अच्छी पॉवरफुल बनाओ तो खराब भी अच्छा हो जायेगा।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
कितना भी कार्य की
चारों ओर की खींचातान हो, बुद्धि सेवा के कार्य में अति बिज़ी हो - ऐसे टाइम पर
अशरीरी बनने का अभ्यास करके देखो। यथार्थ सेवा का कभी बन्धन नहीं होता है क्योंकि
योग युक्त, युक्तियुक्त सेवाधारी सदा सेवा करते भी उपराम रहते हैं। ऐसे नहीं कि सेवा
ज्यादा है इसलिए अशरीरी नहीं बन सकते। याद रखो मेरी सेवा नहीं बाप ने दी है तो
निर्बन्धन रहेंगे।