24-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप तुम्हें
जो पढ़ाई पढ़ाते हैं वह बुद्धि में रख सबको पढ़ानी है, हर एक को बाप का और सृष्टि
चक्र का परिचय देना है''
प्रश्नः-
आत्मा सतयुग
में भी पार्ट बजाती और कलियुग में भी लेकिन अन्तर क्या है?
उत्तर:-
सतयुग में जब
पार्ट बजाती है तो उसमें कोई पाप कर्म नहीं होता है, हर कर्म वहाँ अकर्म हो जाता है
क्योंकि रावण नहीं है। फिर कलियुग में जब पार्ट बजाती है तो हर कर्म विकर्म वा पाप
बन जाता है क्योंकि यहाँ विकार हैं। अभी तुम हो संगम पर। तुम्हें सारा ज्ञान है।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) हम सब आत्मा रूप में भाई-भाई हैं, यह पाठ पक्का करना और कराना है।
अपने संस्कारों को याद से सम्पूर्ण पावन बनाना है।
2) 24 कैरेट सच्चा सोना (सतोप्रधान) बनने के लिए कर्म-अकर्म-विकर्म की गुह्य गति
को बुद्धि में रख अब कोई भी विकर्म नहीं करना है।
वरदान:-
घबराने की
डांस छोड़ सदा खुशी की डांस करने वाले मास्टर नॉलेजफुल भव
जो बच्चे मास्टर नॉलेजफुल
हैं वह कभी घबराने की डांस नहीं कर सकते। सेकण्ड में सीढ़ी नीचे, सेकण्ड में ऊपर अब
यह संस्कार चेंज करो तो बहुत फास्ट जायेंगे। सिर्फ मिली हुई अथॉरिटी को, नॉलेज को,
परिवार के सहयोग को यूज़ करो, बाप के हाथ में हाथ देकर चलते रहो तो खुशी की डांस
करते रहेंगे, घबराने की डांस हो नहीं सकती। लेकिन जब माया का हाथ पकड़ लेते हो तो
वह डांस होती है।
स्लोगन:-
जिनका
संकल्प और कर्म महान है वही मास्टर सर्वशक्तिमान् है।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
मास्टर
त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म, हर संकल्प करो वा वचन बोलो, तो कोई भी कर्म व्यर्थ वा
अनर्थ वाला नहीं हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर
इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म करेंगे तो कर्म के वशीभूत नहीं होंगे। सदा कर्म और
कर्म के बन्धन से मुक्त बन अपनी ऊंची स्टेज को प्राप्त कर लेंगे।