24-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुमने अपनी जीवन डोर एक बाप से बांधी है, तुम्हारा कनेक्शन एक से है, एक से ही तोड़ निभाना है''

प्रश्नः-
संगमयुग पर आत्मा अपनी डोर परमात्मा के साथ जोड़ती है, इसकी रस्म अज्ञान में किस रीति से चलती आ रही है?

उत्तर:-
शादी के समय स्त्री का पल्लव पति के साथ बांधते हैं। स्त्री समझती है जीवन भर उनका ही साथी होकर रहना है। तुमने तो अब अपना पल्लव बाप के साथ जोड़ा है। तुम जानते हो हमारी परवरिश आधाकल्प के लिए बाप द्वारा होगी।

गीत:-
जीवन डोर तुम्हीं संग बांधी........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपने बुद्धि की रूहानी डोर एक बाप के साथ बांधनी है। एक की ही श्रीमत पर चलना है।

2) हम मोस्ट स्वीटेस्ट झाड़ का कलम लगा रहे हैं इसलिए पहले स्वयं को बहुत-बहुत स्वीट बनाना है। याद की यात्रा में तत्पर रह विकर्म विनाश करने हैं।

वरदान:-
मनन शक्ति द्वारा हर प्वाइंट के अनुभवी बनने वाले सदा शक्तिशाली मायाप्रूफ, विघ्नप्रूफ भव

जैसे शरीर की शक्ति के लिए पाचन शक्ति वा हजम करने की शक्ति आवश्यक है ऐसे आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए मनन शक्ति चाहिए। मनन शक्ति द्वारा अनुभव स्वरूप हो जाना - यही सबसे बड़े से बड़ी शक्ति है। ऐसे अनुभवी कभी धोखा नहीं खा सकते, सुनी सुनाई बातों में विचलित नहीं हो सकते। अनुभवी सदा सम्पन्न रहते हैं। वह सदा शक्तिशाली, मायाप्रूफ, विघ्न प्रूफ बन जाते हैं।

स्लोगन:-
खुशी का खजाना सदा साथ रहे तो बाकी सब खजाने स्वत: आ जायेंगे।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

सफलता सम्पन्न बनने के लिए - साधारण कार्य में रहते हुए भी फरिश्ते की चाल और हाल हो। ऐसे नहीं कहो कि क्या करें बात ही ऐसी थी, काम ही ऐसा था, सरकमस्टांश ऐसे थे, समस्या ऐसी थी इसलिए साधारणता आ गई। किसी समय भी, किसी हालत में भी आपका अलौकिक स्वरूप हर एक को अनुभव हो। जैसी बात वैसा अपना स्वरूप नहीं बनाओ। बातें आपको बदल न दें तब सबके समीप आयेंगे और एकता का संगठन मजबूत होगा।