24-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इस महाभारत लड़ाई में पुराना झाड़ समाप्त
होना है इसलिए लड़ाई के पहले बाप से पूरा-पूरा वर्सा ले लो''
प्रश्नः-
बाबा को माताओं
का संगठन चाहिए लेकिन उस संगठन की विशेषता क्या हो?
उत्तर:-
ऐसा संगठन हो
जो देही-अभिमानी रहने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करे, जिन्हें पक्का नशा हो कि हमें
पावन बन पावन दुनिया बनानी है। पतित नहीं बनना है। नष्टोमोहा ग्रुप हो तब कोई कमाल
करके दिखाये। किसी में भी रग नहीं होनी चाहिए। मोह की रग बहुत नुकसान कर देती है।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
इस पुराने शरीर में रहते पढ़ाई पढ़कर 21 जन्मों के लिए कमाई करनी है इसलिए इसकी
सम्भाल करनी है। बाकी इसमें रग नहीं रखनी है।
2) ऐसा अभ्यास करना
है जो अन्तकाल में एक शिवबाबा ही याद रहे। दूसरे किसी भी चिंतन में नहीं जाना है,
अपना कल्याण करना है।
वरदान:-
मास्टर
नॉलेजफुल बन अनजानपने को समाप्त करने वाले ज्ञान स्वरूप, योगयुक्त भव
मास्टर नॉलेजफुल बनने
वालों में किसी भी प्रकार का अनजानपन नहीं रहता, वह ऐसा कहकर अपने को छुड़ा नहीं
सकते कि इस बात का हमें पता ही नहीं था। ज्ञान स्वरूप बच्चों में कोई भी बात का
अज्ञान नहीं रह सकता और जो योगयुक्त हैं उन्हें अनुभव होता जैसेकि पहले से सब कुछ
जानते हैं। वो यह जानते हैं कि माया की छम-छम, रिमझिम कम नहीं है, माया भी बड़ी
रौनकदार है, इसलिए उससे बचकर रहना है, जो सभी रूपों से माया की नॉलेज को समझ गये,
उनके लिए हार खाना असम्भव है।
स्लोगन:-
जो सदा
प्रसन्नचित हैं वह कभी प्रश्नचित नहीं हो सकता।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
योग में सदा लाइट
हाउस और माइट हाउस की स्थिति का अनुभव करो। ज्ञान है लाइट और योग है माइट। ज्ञान और
योग - दोनों शक्तियां लाइट और माइट सम्पन्न हों, इसको कहते हैं मास्टर सर्वशक्तिमान।
ऐसी शक्तिशाली आत्मायें किसी भी परिस्थिति को सेकण्ड में पार कर लेती हैं। टाइम नहीं
लगता।