24-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - सत्य बाप सचखण्ड स्थापन करते हैं, तुम बाप
के पास आये हो नर से नारायण बनने की सच्ची-सच्ची नॉलेज सुनने''
प्रश्नः-
तुम बच्चों को
अपने गृहस्थ व्यवहार में बहुत-बहुत सम्भाल कर चलना है - क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि
तुम्हारी गत-मत सबसे न्यारी है। तुम्हारा गुप्त ज्ञान है इसलिए विशाल बुद्धि बन सबसे
तोड़ निभाना है। अन्दर में समझना है हम सब भाई-भाई वा भाई-बहिन हैं। बाकी ऐसे नहीं
स्त्री अपने पति को कहे तुम मेरे भाई हो। इससे सुनने वाले कहेंगे इनको क्या हो गया।
युक्ति से चलना है।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
इस कयामत के समय जबकि सतयुग की स्थापना हो रही है तो पावन जरूर बनना है। बाप और बाप
के कार्य में कभी संशय नहीं उठाना है।
2) ज्ञान और सम्बन्ध
गुप्त है, इसलिए लौकिक में बहुत युक्ति से विशाल बुद्धि बनकर चलना है। कोई ऐसे शब्द
नहीं बोलने हैं जो सुनने वाले मूँझ जाएं।
वरदान:-
नॉलेज की लाइट
माइट द्वारा कमजोर संस्कारों को समाप्त करने वाले शक्ति सम्पन्न भव
नॉलेज से अपने कमजोर
संस्कारों का मालूम तो पड़ जाता है और जब उस बात की समझानी मिलती है तो वे संस्कार
थोड़े समय के लिए अन्दर दब जाते हैं लेकिन कमजोर संस्कार समाप्त करने के लिए लाइट
और माइट के एकस्ट्रा फोर्स की आवश्यकता है। इसके लिए मास्टर सर्वशक्तिवान, मास्टर
नॉलेजफुल के साथ-साथ चेकिंग मास्टर बनो। नॉलेज द्वारा स्वयं में शक्ति भरो, मनन
शक्ति को बढ़ाओ तो शक्ति सम्पन्न बन जायेंगे।
स्लोगन:-
जहाँ सर्व
प्राप्तियां हैं वहाँ प्रसन्नता है।
ये अव्यक्त इशारे -
अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
अगर देने के बाद यह
भी संकल्प आता है कि मैंने इतना दिया, मुझे इससे कुछ मान-शान वा महिमा मिलनी चाहिए,
तो यह भी लेने की भावना हुई। दाता के बच्चे अगर यह लेने का संकल्प भी करते हैं तो
दाता नहीं हुए। यह भी लेना, देने वाले के आगे शोभता नहीं है।