24-11-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हारा यह टाइम बहुत-बहुत वैल्युएबल है, इसलिए इसे व्यर्थ मत गँवाओ, पात्र को देखकर ज्ञान दान करो''

प्रश्नः-
गुणों की धारणा भी होती जाए और चलन भी सुधरती रहे उसकी सहज विधि क्या है?

उत्तर:-
जो बाबा ने समझाया है - वह दूसरों को समझाओ। ज्ञान धन का दान करो तो गुणों की धारणा भी सहज होती जायेगी, चलन भी सुधरती रहेगी। जिनकी बुद्धि में यह नॉलेज नहीं रहती है, ज्ञान धन का दान नहीं करते, वह हैं मनहूस। वह मुफ्त अपने को घाटा डालते हैं।

गीत:-
बचपन के दिन भुला न देना........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) कुछ भी होता है तो भावी समझ शान्त रहना है। क्रोध नहीं करना है। जितना हो सके अपने आपको कन्ट्रोल करना है। युक्ति रच आपसमान बनाने की कोशिश करनी है।

2) बहुत प्यार और नम्रता से सबको बाप का परिचय देना है। सबको यही मीठी-मीठी बात सुनाओ कि बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझ मुझे याद करो, इस देह से नष्टोमोहा हो जाओ।

वरदान:-
हर आत्मा को भटकने वा भिखारीपन से बचाने वाले निष्काम रहमदिल भव

जो बच्चे निष्काम रहमदिल हैं उनके रहम के संकल्प से अन्य आत्माओं को अपने रूहानी रूप वा रूह की मंजिल सेकण्ड में स्मृति में आ जायेगी। उनके रहम के संकल्प से भिखारी को सर्व खजानों की झलक दिखाई देगी। भटकती हुई आत्माओं को मुक्ति वा जीवनमुक्ति का किनारा व मंजिल सामने दिखाई देगी। वे सर्व के दुख हर्ता सुख कर्ता का पार्ट बजायेंगे, दुखी को सुखी करने की युक्ति व साधन सदा उनके पास जादू की चाबी के माफिक होगा।

स्लोगन:-
सेवाधारी बन नि:स्वार्थ सेवा करो तो सेवा का मेवा मिलना ही है।

अव्यक्त इशारे - अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ

अन्त समय में प्रकृति के पांचों ही तत्व अच्छी तरह से हिलाने की कोशिश करेंगे, परन्तु विदेही अवस्था की अभ्यासी आत्मा बिल्कुल ऐसा अचल-अडोल पास विद आनर होगी जो सब बातें पास हो जायेंगी लेकिन वह ब्रह्मा बाप के समान पास विद आनर का सबूत देगी, इसके लिए समय निकालकर प्रकृति के पांचों तत्वों की सेवा करते, शुभ भावना की सकाश देते रहो।