25-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 02.04.2008 "बापदादा" मधुबन
इस वर्ष चारों ही
सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ
वरदान:-
धर्म और कर्म
दोनों का ठीक बैलेन्स रखने वाले दिव्य वा श्रेष्ठ बुद्धिवान भव
कर्म करते समय धर्म
अर्थात् धारणा भी सम्पूर्ण हो तो धर्म और कर्म दोनों का बैलेन्स ठीक होने से प्रभाव
बढ़ेगा। ऐसे नहीं जब कर्म समाप्त हो तब धारणा स्मृति में आये। बुद्धि में दोनों बातों
का बैलेन्स ठीक हो तब कहेंगे श्रेष्ठ वा दिव्य बुद्धिवान। नहीं तो साधारण बुद्धि,
कर्म भी साधारण, धारणायें भी साधारण होती हैं। तो साधारणता में समानता नहीं लानी है
लेकिन श्रेष्ठता में समानता हो। जैसे कर्म श्रेष्ठ वैसे धारणा भी श्रेष्ठ हो।
स्लोगन:-
अपने मन-बुद्धि को अनुभव की सीट पर सेट कर दो तो कभी अपसेट नहीं होंगे।
अव्यक्त इशारे - इस
अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
ज्ञान-स्वरुप मास्टर
नॉलेजफुल, मास्टर सर्वशक्तिमान होने के बाद अगर कोई ऐसा कर्म जो युक्तियुक्त नहीं
है, वह कर लेते हो तो इस कर्म का बन्धन अज्ञान काल के कर्मबन्धन से पदमगुणा ज्यादा
है। इस कारण बन्धनयुक्त आत्मा स्वतन्त्र न होने कारण जो चाहे वह नहीं कर पाती इसलिए
युक्तियुक्त कर्म द्वारा मुक्ति को प्राप्त करो।