25-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम ब्राह्मण सो देवता बनते हो, तुम्हीं भारत को स्वर्ग बनाते हो, तो तुम्हें अपनी ब्राह्मण जाति का नशा चाहिए''

प्रश्नः-
सच्चे ब्राह्मणों की मुख्य निशानियां क्या होंगी?

उत्तर:-
सच्चे ब्राह्मणों का इस पुरानी दुनिया से लंगर उठा हुआ होगा। वह जैसे इस दुनिया का किनारा छोड़ चुके। 2. सच्चे ब्राह्मण वह जो हाथों से काम करें और बुद्धि सदा बाप की याद में रहे अर्थात् कर्मयोगी हो। 3. ब्राह्मण अर्थात् कमल फूल समान। 4. ब्राह्मण अर्थात् सदा आत्म-अभिमानी रहने का पुरुषार्थ करने वाले। 5. ब्राह्मण अर्थात् काम महाशत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) मन्सा-वाचा-कर्मणा बहुत-बहुत एक्यूरेट बनना है। ब्राह्मण बनकर कोई भी शूद्रों के कर्म नहीं करने हैं।

2) बाबा से जो राय मिलती है उस पर पूरा-पूरा चलकर फरमानबरदार बनना है। कर्मयोगी बन हर कार्य करना है। सर्व की झोली ज्ञान रत्नों से भरनी है।

वरदान:-
डबल लाइट बन कर्मातीत अवस्था का अनुभव करने वाले कर्मयोगी भव

जैसे कर्म में आना स्वाभाविक हो गया है वैसे कर्मातीत होना भी स्वाभाविक हो जाए, इसके लिए डबल लाइट रहो। डबल लाइट रहने के लिए कर्म करते हुए स्वयं को ट्रस्टी समझो और आत्मिक स्थिति में रहने का अभ्यास करो, इन्हीं दो बातों का अटेन्शन रखने से सेकण्ड में कर्मातीत, सेकेण्ड में कर्मयोगी बन जायेंगे। निमित्त मात्र कर्म करने के लिए कर्मयोगी बनो फिर कर्मातीत अवस्था का अनुभव करो।

स्लोगन:-
जिनकी दिल बड़ी है उनके लिए असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाते हैं।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

आपमें जो भी विशेषतायें हैं, उनको सामने रखो, कमजोरियों को नहीं, तो अपने आप में फेथ रहेगा। कमजोरी की बात को ज्यादा नहीं सोचना, तो सदा खुशी में आगे बढ़ते जायेंगे। प्रैक्टिकल में अनेक देश, अनेक भाषायें, अनेक रूप-रंग लेकिन अनेकता में भी सबके दिल में एकता है ना! क्योंकि दिल में एक बाप है। एक श्रीमत पर चलने वाले हो। अनेक भाषाओं में होते हुए भी मन का गीत, मन की भाषा एक है।