25-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अपने आपसे
पूछो कि मैं कर्मेन्द्रियजीत बना हूँ, कोई भी कर्मेन्द्रिय मुझे धोखा तो नहीं देती
हैं!''
प्रश्नः-
कर्मातीत बनने
के लिए तुम बच्चों को अपने आपसे कौन सा वायदा करना है?
उत्तर:-
अपने से वायदा
करो कि कोई भी कर्मेन्द्रिय कभी भी चलायमान हो नहीं सकती। मुझे अपनी कर्मेन्द्रियाँ
वश में करनी हैं। बाबा ने जो भी डायरेक्शन दिये हैं, उन्हें अमल में लाना ही है।
बाबा कहे - मीठे बच्चे, कर्मातीत बनना है तो कोई भी कर्मेन्द्रिय से विकर्म मत करो।
माया बड़ी प्रबल है। आंखें धोखेबाज हैं इसलिए अपनी सम्भाल करो।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं में जो भी बुरी आदतें हैं - उनकी जांच कर उन्हें निकालने के
लिए मेहनत करनी है। अपना सच्चा-सच्चा पोतामेल रखना है। बाप के डायरेक्शन पर चलना
है।
2) ऐसा कोई कर्म नहीं करना है, जिससे बाप का नाम बदनाम हो। अपनी उन्नति का ख्याल
रखना है। जरा भी कुदृष्टि नहीं रखनी है।
वरदान:-
स्थूल वा
सूक्ष्म में हर फरमान को पालन करने वाले सम्पूर्ण फरमानबरदार भव
स्थूल फरमान पालन करने की
शक्ति उन्हीं बच्चों में आ सकती है जो सूक्ष्म फरमान पालन करते हैं। सूक्ष्म और
मुख्य फरमान है निरन्तर याद में रहो वा मन-वचन-कर्म से पवित्र बनो। संकल्प में भी
अपवित्रता व अशुद्धता न हो। यदि संकल्प में भी पुराने अशुद्ध संस्कार टच करते हैं
तो सम्पूर्ण वैष्णव वा सम्पूर्ण पवित्र नहीं कहेंगे। इसलिए कोई एक संकल्प भी फरमान
के सिवाए न चले तब कहेंगे सम्पूर्ण फरमानबरदार।
स्लोगन:-
बाप को
जानकर दिल से बाबा कहना यह सबसे बड़ी विशेषता है।
ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
एकरस स्थिति बनाने के लिए कर्मयोगी बनो। कर्मयोगी के आगे कोई कैसा भी आ जाए वह स्वयं
सदा न्यारा और प्यारा रहेगा। नॉलेज द्वारा जानेगा - इसका यह पार्ट चल रहा है। वह
अच्छे को अच्छा समझकर साक्षी होकर देखेगा और बुरे को रहमदिल बन रहम की निगाह से
परिवर्तन करने की शुभ भावना से साक्षी होकर देखेगा, यही एकरस स्थिति बनाने का साधन
है।