25-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - कदम-कदम पर
जो होता है वह कल्याणकारी है, इस ड्रामा में सबसे अधिक कल्याण उनका होता है जो बाप
की याद में रहते हैं''
प्रश्नः-
ड्रामा की किस
नूँध को जानने वाले बच्चे अपार खुशी में रह सकते हैं?
उत्तर:-
जो जानते हैं
कि ड्रामानुसार अब इस पुरानी दुनिया का विनाश होगा, नैचुरल कैलेमिटीज भी होंगी।
लेकिन हमारी राजधानी तो स्थापन होनी ही है, इसमें कोई कुछ कर नहीं सकता। भल अवस्थायें
नीचे-ऊपर होती रहेंगी, कभी बहुत उमंग, कभी ठण्डे ठार हो जायेंगे, इसमें मूँझना नहीं
है। सभी आत्माओं का बाप भगवान हमको पढ़ा रहे हैं, इस खुशी में रहना है।
गीत:-
महफिल में जल
उठी शमा ........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सदा इसी स्मृति में रहना है कि हम गोपी वल्लभ के गोप-गोपियां हैं। इसी
स्मृति से सदा खुशी का पारा चढ़ा रहे।
2) अभी तक जो कुछ पढ़ा है, उसे बुद्धि से भूल बाप जो सुनाते हैं वही पढ़ना है।
हम भाई बहिन हैं इस स्मृति से क्रिमिनल आई को खत्म करना है। माया से हार नहीं खानी
है।
वरदान:-
सेवा द्वारा
योगयुक्त स्थिति का अनुभव करने वाले रूहानी सेवाधारी भव
ब्राह्मण जीवन सेवा का
जीवन है। माया से जिंदा रखने का श्रेष्ठ साधन सेवा है। सेवा योगयुक्त बनाती है
लेकिन सिर्फ मुख की सेवा नहीं, सुने हुए मधुर बोल का स्वरूप बन सेवा करना,
नि:स्वार्थ सेवा करना, त्याग, तपस्या स्वरूप से सेवा करना, हद की कामनाओं से परे
निष्काम सेवा करना - इसको कहा जाता है ईश्वरीय वा रूहानी सेवा। मुख के साथ मन द्वारा
सेवा करना अर्थात् मनमनाभव स्थिति में स्थित होना।
स्लोगन:-
आकृति
को न देखकर निराकार बाप को देखेंगे तो आकर्षण मूर्त बन जायेंगे।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
बापदादा का बच्चों
से इतना प्यार है जो समझते हैं हर एक बच्चा मेरे से भी आगे हो। दुनिया में भी जिससे
ज्यादा प्यार होता है उसे अपने से भी आगे बढ़ाते हैं। यही प्यार की निशानी है। तो
बापदादा भी कहते हैं मेरे बच्चों में अब कोई भी कमी नहीं रहे, सब सम्पूर्ण, सम्पन्न
और समान बन जायें। यही परमात्म प्यार सहजयोगी बना देता है।