25-12-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“ मीठे बच्चे - तुम बहुत समय के बाद फिर से बाप से मिले हो इसलिए तुम बहुत - बहुत सिकीलधे हो ''

प्रश्नः-
अपनी स्थिति को एकरस बनाने का साधन क्या है?

उत्तर:-
सदा याद रखो जो सेकेण्ड पास हुआ, ड्रामा। कल्प पहले भी ऐसे ही हुआ था। अभी तो निंदा-स्तुति, मान-अपमान सब सामने आना है इसलिए अपनी स्थिति को एकरस बनाने के लिए पास्ट का चिंतन मत करो।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) कोई भी ऐसा कर्म नहीं करना है जिससे किसी को दु:ख हो। कड़ुवे बोल नहीं बोलने हैं। बहुत-बहुत क्षीरखण्ड होकर रहना है।

2) किसी भी देहधारी की स्तुति नहीं करनी है। बुद्धि में रहे हमको शिवबाबा पढ़ाते हैं, उस एक की ही महिमा करनी है, रूहानी खिदमतगार बनना है।

वरदान:-
शुद्ध संकल्प के व्रत ( दृढ़ता ) द्वारा वृत्ति का परिवर्तन करने वाले दिलतख्तनशीन भव

बापदादा का दिलतख्त इतना प्योर है जो इस तख्त पर सदा प्योर आत्मायें ही बैठ सकती हैं। जिनके संकल्प में भी अपवित्रता या अमर्यादा आ जाती है वो तख्तनशीन के बजाए गिरती कला में नीचे आ जाते हैं इसलिए पहले शुद्ध संकल्प के व्रत द्वारा अपनी वृत्ति का परिवर्तन करो। वृत्ति परिवर्तन से भविष्य जीवन रूपी सृष्टि बदल जायेगी। शुद्ध संकल्प व दृढ़ संकल्प के व्रत का प्रत्यक्षफल है ही सदाकाल के लिए बापदादा का दिलतख्त।

स्लोगन:-
जहाँ सर्वशक्तियां साथ हैं वहाँ निर्विघ्न सफलता है ही।

अव्यक्त इशारे - अब सम्पन्न वा कर्मातीत बनने की धुन लगाओ

अन्त:वाहक स्थिति अर्थात् कर्मबन्धन मुक्त कर्मातीत स्थिति का वाहन अर्थात् अन्तिम वाहन, जिस द्वारा ही सेकण्ड में साथ में उड़ेंगे। इसके लिए सर्व हदों से पार बेहद स्वरूप में, बेहद के सेवाधारी, सर्व हदों के ऊपर विजय प्राप्त करने वाले विजयी रत्न बनो तब ही अन्तिम कर्मातीत स्वरूप के अनुभवी स्वरूप बनेंगे।