26-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुमने आधाकल्प जिसकी भक्ति की है, वही बाप खुद तुम्हें पढ़ा रहे हैं, इस पढ़ाई से ही तुम देवी देवता बनते हो''

प्रश्नः-
योगबल के लिफ्ट की कमाल क्या है?

उत्तर:-
तुम बच्चे योगबल की लिफ्ट से सेकेण्ड में ऊपर चढ़ जाते हो अर्थात् सेकेण्ड में जीवनमुक्ति का वर्सा तुम्हें मिल जाता है। तुम जानते हो सीढ़ी उतरने में 5 हज़ार वर्ष लगे और चढ़ते हैं एक सेकेण्ड में, यही है योगबल की कमाल। बाप की याद से सब पाप कट जाते हैं। आत्मा सतोप्रधान बन जाती है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) जगत का मालिक बनने वा विश्व की बादशाही लेने के लिए मुख्य काम विकार पर जीत पानी है। सम्पूर्ण निर्विकारी जरूर बनना है।

2) जैसे हमें बाप मिला है ऐसे सबको बाप से मिलाने की कोशिश करनी है। बाप की सही पहचान देनी है। सच्ची-सच्ची यात्रा सिखलानी है।

वरदान:-
गम की दुनिया सामने होते हुए भी बेगमपुर की बादशाही का अनुभव करने वाले अष्ट शक्ति स्वरुप भव

गम और बेगम की अभी ही नॉलेज है, गम की दुनिया सामने होते भी सदा बेगमपुर के बादशाही का अनुभव करना - यही अष्ट शक्ति स्वरुप, कर्मेन्द्रिय जीत बच्चों की निशानी है। अभी ही बाप द्वारा सर्वशक्तियों की प्राप्ति होती है लेकिन अगर कोई न कोई संगदोष वा कोई कर्मेन्द्रिय के वशीभूत हो अपनी शक्ति खो लेते हो तो जो बेगमपुर का नशा वा खुशी प्राप्त है वह स्वत: ही खो जाती है। बेगमपुर के बादशाह भी कंगाल बन जाते हैं।

स्लोगन:-
दृढ़ता की शक्ति सदा साथ हो तो सफलता गले का हार है।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

अपने संकल्पों के तूफान वा कोई भी सम्बन्ध द्वारा, प्रकृति वा समस्याओं द्वारा तूफान व विघ्न आते हैं तो उनसे मुक्ति पाने के लिए योग युक्त, युक्ति-युक्त बनो। जब तक योगयुक्त नहीं तब तक विघ्नों से युक्त हो।