26-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - सदा इसी खुशी
में रहो कि स्वयं भगवान हमें टीचर बनकर पढ़ाते हैं, हम उनसे राजयोग सीख रहे हैं,
प्रजा योग नहीं''
प्रश्नः-
इस पढ़ाई की
खूबी कौन सी है? तुम्हें कब तक पुरुषार्थ करना है?
उत्तर:-
यह पढ़ाई जो
बहुत समय से करते आ रहे हैं, उनसे नये बच्चे तीखे चले जाते हैं। यह भी खूबी है जो 3
मास के तीखी बुद्धि वाले (तीव्र पुरुषार्थी) नये बच्चे पुरानों से भी आगे जा सकते
हैं। तुम्हें पुरुषार्थ तब तक करना है जब तक पूरे पास न हो, कर्मातीत अवस्था न हो,
सब हिसाब-किताब छूट न जायें।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस हीरे तुल्य अनमोल जीवन को कौड़ियों के पीछे नहीं गँवाना है। मौत
सामने खड़ा है इसलिए अपना सब कुछ रूहानी सेवा में सफल करना है।
2) पढ़ाई और पढ़ाने वाले से सच्ची प्रीत रखनी है। भगवान हमको पढ़ाने आते हैं, इस
खुशी में रहना है।
वरदान:-
कैचिंग पावर
द्वारा अपने असली संस्कारों को कैच कर उनका स्वरुप बनने वाले शक्तिशाली भव
पुरुषार्थ का मुख्य आधार
कैचिंग पावर है। जैसे साइंसदान बहुत पहले के साउण्ड को कैच करते हैं ऐसे आप
साइलेन्स की शक्ति से अपने आदि दैवी संस्कार कैच करो, इसके लिए सदैव यही स्मृति रहे
कि मैं यही था और फिर बन रहा हूँ। जितना उन संस्कारों को कैच करेंगे उतना उसका
स्वरूप बनेंगे। 5 हजार वर्ष की बात इतनी स्पष्ट अनुभव में आये जैसे कल की बात है।
अपनी स्मृति को इतना श्रेष्ठ और स्पष्ट बनाओ तब शक्तिशाली बनेंगे।
स्लोगन:-
ब्राह्मण जीवन का श्वास खुशी है, शरीर भल चला जाए लेकिन खुशी न जाए।
ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
एक धक से सौदा करने वाले एक के होने कारण सदा एकरस रहते हैं। बाकी जो थोड़ा-थोड़ा
करके सौदा करते हैं - एक के बजाए दो नाव में पांव रखने वाले हैं, वह सदा कोई न कोई
उलझन की हलचल में, एकरस नहीं बनते हैं, इसलिए सौदा करना है तो सेकण्ड में करो। दिल
के टुकड़े-टुकड़े नहीं करो।