26-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 02.02.2011 "बापदादा" मधुबन
अपने भाग्य और
प्राप्तियों को स्मृति में रख सदा हर्षित व सन्तुष्ट रहो, दृष्टि वृत्ति और
प्रवृत्ति द्वारा सन्तुष्टता का अनुभव कराओ
वरदान:-
शक्ति रूप की
स्मृति द्वारा पतित संस्कारों का नाश करने वाले काली रूप भव
सदा अपना यह स्वरूप
स्मृति में रहे कि मैं सर्व शस्त्रधारी शक्ति हूँ, मुझ पतित-पावनी पर कोई पतित आत्मा
के नज़र की परछाई भी नहीं पड़ सकती। पतित आत्मा के पतित संकल्प भी न चल सकें - ऐसी
अपनी ब्रेक पावरफुल चाहिए। यदि किसी पतित आत्मा का प्रभाव पड़ता है - तो इसका अर्थ
है कि प्रभावशाली नहीं हो। जो स्वयं संघारी हैं वह कभी किसका शिकार नहीं बन सकते।
तो ऐसा काली रूप बनो जो कोई भी आपके सामने ऐसा संकल्प भी करे तो उनका संकल्प
मूर्छित हो जाए।
स्लोगन:-
रॉयल रूप की इच्छा का स्वरूप नाम, मान और शान है।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
सारथी अर्थात्
आत्म-अभिमानी क्योंकि आत्मा ही सारथी है। ब्रह्मा बाप ने इस विधि से नम्बरवन की
सिद्धि प्राप्त की। तो फॉलो फॉदर करो। जैसे बाप देह को अधीन कर प्रवेश होते अर्थात्
सारथी बनते हैं देह के अधीन नहीं होते, इसलिए न्यारे और प्यारे हैं। ऐसे ही आप सभी
ब्राह्मण आत्माएं भी बाप समान सारथी की स्थिति में रहो। सारथी स्वत: ही साक्षी हो
कुछ भी करेंगे, देखेंगे, सुनेंगे और सब-कुछ करते भी माया की लेप-छेप से निर्लेप
रहेंगे।