26-08-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - ज्ञान सागर बाप आये हैं ज्ञान वर्षा कर इस धरती को सब्ज बनाने, अभी स्वर्ग की स्थापना हो रही है, उसमें चलने के लिए दैवी सम्प्रदाय का बनना है''

प्रश्नः-
सर्वोत्तम कुल वाले बच्चों का मुख्य कर्तव्य क्या है?

उत्तर:-
सदा ऊंची रूहानी सेवा करना। यहाँ बैठे वा चलते-फिरते खास भारत और आम सारे विश्व को पावन बनाना, श्रीमत पर बाप के मददगार बनना - यही सर्वोत्तम ब्राह्मणों का कर्तव्य है।

गीत:-
जो पिया के साथ है........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप के समान टीचर बनना है, बड़ी युक्ति से सबको इस झूठखण्ड से निकाल सचखण्ड में चलने के लायक बनाना है।

2) दुनिया का संग कुसंग है, इसलिए कुसंग से किनारा कर एक सत का संग करना है। ऊंच पद के लिए इस पढ़ाई में लग जाना है। एक बाप की मत पर ही चलना है।

वरदान:-
अपना सब कुछ सेवा में अर्पित करने वाले गुप्त दानी पुण्य आत्मा भव

जो भी सेवा करते हो उसे विश्व कल्याण के लिए अर्पित करते चलो। जैसे भक्ति में जो गुप्त दानी पुण्य आत्मायें होती हैं वो यही संकल्प करती हैं कि सर्व के भले प्रति हो। ऐसे आपका हर संकल्प सेवा में अर्पित हो। कभी अपनेपन की कामना नहीं रखो। सर्व प्रति सेवा करो। जो सेवा विघ्न रूप बने उसे सच्ची सेवा नहीं कहेंगे इसलिए अपना पन छोड़ गुप्त और सच्चे सेवाधारी बन सेवा से विश्व कल्याण करते चलो।

स्लोगन:-
हर बात प्रभू अर्पण कर दो तो आने वाली मुश्किलातें सहज अनुभव होंगी।

अव्यक्त इशारे - सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो

आदिकाल, अमृतवेले अपने दिल में परमात्म प्यार को सम्पूर्ण रूप से धारण कर लो। अगर दिल में परमात्म प्यार, परमात्म शक्तियाँ, परमात्म ज्ञान फुल होगा तो कभी और किसी भी तरफ लगाव या स्नेह जा नहीं सकता। बाप से सच्चा प्यार है तो प्यार की निशानी है - समान, कर्मातीत। ‘करावनहार' होकर कर्म करो, कराओ। कभी भी मन-बुद्धि वा संस्कारों के वश होकर कोई भी कर्म नहीं करो।