26-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अपना सच्चा-सच्चा चार्ट रखो तो अवस्था अच्छी
रहेगी, चार्ट रखने से कल्याण होता रहेगा''
प्रश्नः-
कौन सी स्मृति
पुरानी दुनिया से सहज ही किनारा करा देती है?
उत्तर:-
अगर यह स्मृति
रहे कि हम कल्प-कल्प बाप से बेहद का वर्सा लेते हैं। अभी फिर से हमने शिवबाबा की
गोद ली है - वर्सा लेने के लिए। बाबा ने हमें एडाप्ट किया है, हम सच्चे-सच्चे
ब्राह्मण बने हैं। शिवबाबा हमें गीता सुना रहे हैं। यही स्मृति पुरानी दुनिया से
किनारा करा देगी।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
बाप समान रहमदिल, दु:ख हर्ता सुख कर्ता बनना है।
2) संगदोष से अपनी
बहुत-बहुत सम्भाल करनी है। एक बाप को ही फॉलो करना है। बहुतों के कल्याण की सर्विस
करनी है। कभी अहंकार में आकर मिया मिट्ठू नहीं बनना है
वरदान:-
अन्तर्मुखी बन
अपने समय और संकल्पों की बचत करने वाले विघ्न जीत भव
कोई भी नई पावरफुल
इन्वेन्शन करते हैं तो अन्डरग्राउण्ड करते हैं। आप भी जितना अन्तर्मुखी अर्थात्
अन्डरग्राउण्ड रहेंगे उतना वायुमण्डल से बचाव हो जायेगा, मनन शक्ति बढ़ेगी और माया
के विघ्नों से भी सेफ हो जायेंगे। बाहरमुखता में आते भी अन्तर्मुख, हर्षितमुख,
आकर्षणमूर्त रहो, कर्म करते भी यह प्रैक्टिस करो तो समय की बचत होगी और सफलता भी
अधिक अनुभव करेंगे।
स्लोगन:-
बीमारी से
घबराओ नहीं, उसे दवाई रूपी फ्रूट खिलाकर विदाई दे दो।
ये अव्यक्त इशारे -
अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
तुम बच्चों को किसी
भी आत्मा से कुछ लेना नहीं है। सिर्फ एक बाप से ही लेना है और जो लिया है वह सबको
देना है। जहाँ देना है, वहाँ लेने की इच्छा नहीं रखना। अगर आत्मा, आत्मा द्वारा कुछ-भी
लेने की इच्छा रखती है तो उन्हें अल्पज्ञ आत्माओं से अल्पकाल की ही प्राप्ति होगी।
एक सर्वज्ञ बाप से ही सदाकाल की प्राप्ति होगी। किसी भी प्रकार की लेने की इच्छा
अपने स्वमान से गिरा देती है।