26-11-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


‘मीठे बच्चे - तुम अभी वर्ल्ड सर्वेन्ट हो, तुम्हें किसी भी बात में देह-अभिमान नहीं आना चाहिए''

प्रश्नः-
कौन सी एक आदत ईश्वरीय कायदे के विरूद्ध है, जिससे बहुत नुकसान होता है?

उत्तर:-
कोई भी फिल्मी कहानियां सुनना वा पढ़ना, नाविल्स पढ़ना... यह आदत बिल्कुल बेकायदे है, इससे बहुत नुक-सान होता है। बाबा की मना है - बच्चे, तुम्हें ऐसी कोई किताबें नहीं पढ़नी है। अगर कोई बी.के. ऐसी पुस्तकें पढ़ता है तो तुम एक-दो को सावधान करो।

गीत:-
मुखड़ा देख ले प्राणी.....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) एम आब्जेक्ट का चित्र सदा साथ रखना है। नशा रहे कि अभी हम श्रीमत पर विश्व का मालिक बन रहे हैं। हम ऐसे फूलों के बगीचे में जाते हैं - जहाँ हमारे नयन ही शीतल हो जायेंगे।

2) सर्विस का बहुत-बहुत शौक रखना है। बड़े दिल वा उमंग से बड़े-बड़े चित्रों पर सर्विस करनी है। बेगर टू प्रिन्स बनाना है।

वरदान:-
कर्मो की गति को जान गति-सद्गति का फैंसला करने वाले मास्टर दु:ख हर्ता सुख कर्ता भव

अभी तक अपने जीवन की कहानी देखने और सुनाने में बिजी नहीं रहो। बल्कि हर एक के कर्म की गति को जान गति सद्गति देने के फैंसले करो। मास्टरदु:ख हर्ता सुख कर्ता का पार्ट बजाओ। अपनी रचना के दु:ख अशान्ति की समस्या को समाप्त करो, उन्हें महादान और वरदान दो। खुद फैसल्टीज़ (सुविधायें) न लो, अब तो दाता बनकर दो। यदि सैलवेशन के आधार पर स्वयं की उन्नति वा सेवा में अल्पकाल के लिए सफलता प्राप्त हो भी जाये तो भी आज महान होंगे कल महानता की प्यासी आत्मा बन जायेंगे।

स्लोगन:-
अनुभूति न होना - युद्ध की स्टेज है, योगी बनो योद्धे नहीं।

अव्यक्त इशारे - अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ

जैसे ब्रह्मा बाप अव्यक्त बन विदेही स्थिति द्वारा कर्मातीत बने, तो अव्यक्त ब्रह्मा की विशेष पालना के पात्र हो इसलिए अव्यक्त पालना का रेसपान्ड विदेही बनकर दो। सेवा और स्थिति का बैलेन्स रखो। विदेही माना देह से न्यारा। स्वभाव, संस्कार, कमजोरियां सब देह के साथ हैं और देह से न्यारा हो गया तो सबसे न्यारा हो गया, इसलिए यह ड्रिल बहुत सहयोग देगी, इसमें कन्ट्रोलिंग पावर चाहिए।