27-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - कदम-कदम
श्रीमत पर चलो, नहीं तो माया देवाला निकाल देगी, यह आंखे बहुत धोखा देती हैं, इनकी
बहुत-बहुत सम्भाल करो''
प्रश्नः-
किन बच्चों से
माया बहुत विकर्म कराती है? यज्ञ में विघ्न रूप कौन हैं?
उत्तर:-
जिन्हें अपना
अंहकार रहता है उनसे माया बहुत विकर्म कराती है। ऐसे मिथ्या अंहकार वाले मुरली भी
नहीं पढ़ते। ऐसी गफलत करने से माया थप्पड़ लगाए वर्थ नाट पेनी बना देती है। यज्ञ
में विघ्न रूप वो हैं जिनकी बुद्धि में झरमुई झगमुई (परचिंतन) की बातें रहती हैं,
यह बहुत खराब आदत है।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपने ऊपर बहुत कन्ट्रोल रखना है। श्रीमत में कभी बेपरवाह नहीं बनना
है। बहुत-बहुत खबरदार रहना है, कभी कोई कायदे का उल्लंघन न हो।
2) अन्तर्मुख हो एक बाप से बुद्धि की लिंक जोड़नी है। इस पतित पुरानी दुनिया से
बेहद का वैराग्य रखना है। बुद्धि में रहे - जो कर्म मैं करुँगा, मुझे देख सब करेंगे।
वरदान:-
ज्ञान की
प्वाइन्ट्स को हर रोज़ रिवाइज कर समाधान स्वरुप बनने वाले बेगमपुर के बादशाह भव
ज्ञान की प्वॉइन्ट्स जो
डायरियों में अथवा बुद्धि में रहती हैं उन्हें हर रोज़ रिवाइज़ करो और उन्हें अनुभव
में लाओ तो किसी भी प्रकार की समस्या का सहज ही समाधान कर सकेंगे। कभी भी व्यर्थ
संकल्पों के हेमर से समस्या के पत्थर को तोड़ने में समय नहीं गंवाओ। “ड्रामा'' शब्द
की स्मृति से हाई जम्प दे आगे बढ़ो। फिर ये पुराने संस्कार आपके दास बन जायेंगे,
लेकिन पहले बादशाह बनो, तख्तनशीन बनो।
स्लोगन:-
हर एक
को सम्मान देना ही सम्मान प्राप्त करना है।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
जीवन-बन्ध के साथ
ही जीवन-मुक्त का अनुभव होता है, वहाँ तो जीवन-बन्ध की बात ही नहीं। वहाँ तो सिर्फ
उसी प्रारब्ध में होंगे, मुक्तिधाम की मुक्ति का अनुभव जो अभी कर सकते हो वह वहाँ
नहीं कर सकेंगे इसलिए संगमयुग पर मुक्ति-जीवन-मुक्ति का अनुभव करो। वर्से के अधिकारी
तो बने हो अब उसे जीवन में धारण कर पूरा लाभ उठाओ।