27-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अपनी
सतोप्रधान तकदीर बनाने के लिए याद में रहने का खूब पुरुषार्थ करो, सदा याद रहे मैं
आत्मा हूँ, बाप से पूरा वर्सा लेना है''
प्रश्नः-
बच्चों को याद
का चार्ट रखना मुश्किल क्यों लगता है?
उत्तर:-
क्योंकि कई
बच्चे याद को यथार्थ समझते ही नहीं हैं। बैठते हैं याद में और बुद्धि बाहर भटकती
है। शान्त नहीं होती। वह फिर वायुमण्डल को खराब करते हैं। याद करते ही नहीं तो
चार्ट फिर कैसे लिखें। अगर कोई झूठ लिखते हैं तो बहुत दण्ड पड़ जाता है। सच्चे बाप
को सच बताना पड़े।
गीत:-
तकदीर जगाकर
आई हूँ........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) श्रीमत पर चलकर सारे विश्व को स्वर्ग बनाने की सेवा करनी है, बहुतों
को आप समान बनाना है। आसुरी मत से अपनी सम्भाल करनी है।
2) याद की मेहनत से आत्मा को सतोप्रधान बनाना है। सुदामा मिसल जो भी चावल मुट्ठी
हैं वह सब सफल कर अपनी सर्व कामनायें सिद्ध करनी है।
वरदान:-
एक बाप दूसरा
न कोई - इस दृढ़ संकल्प द्वारा अविनाशी, अमर भव
जो बच्चे यह दृढ़ संकल्प
करते हैं कि एक बाप दूसरा न कोई.....उनकी स्थिति स्वत: और सहज एकरस हो जाती है। इसी
दृढ़ संकल्प से सर्व सम्बन्धों की अविनाशी तार जुड़ जाती है और उन्हें सदा अविनाशी
भव, अमर भव का वरदान मिल जाता है। दृढ़ संकल्प करने से पुरुषार्थ में भी विशेष रूप
से लिफ्ट मिलती है। जिनके एक बाप से सर्व सम्बन्ध हैं उन्हें सर्व प्राप्तियां स्वत:
हो जाती हैं।
स्लोगन:-
सोचना-बोलना और करना तीनों को एक समान बनाओ - तब कहेंगे सर्वोत्तम पुरुषार्थी।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
जिस समय जिस
सम्बन्ध की आवश्यकता हो, उसी सम्बन्ध से भगवान को अपना बना लो। दिल से कहो मेरा बाबा,
और बाबा कहे मेरे बच्चे, इसी स्नेह के सागर में समा जाओ। यह स्नेह छत्रछाया का काम
करता है, इसके अन्दर माया आ नहीं सकती, यही सहजयोगी बनने का साधन है।