27-09-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 15.12.2011 "बापदादा"    मधुबन


सदा फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो, तीव्र पुरुषार्थ द्वारा सम्पन्न और समान बन साथ चलने की तैयारी करो


वरदान:-
हर शिक्षा को स्वरूप में लाकर सबूत देने वाले सपूत वा साक्षात्कार मूर्त भव

जो बच्चे शिक्षाओं को सिर्फ शिक्षा की रीति से बुद्धि में नहीं रखते, लेकिन उन्हें स्वरूप में लाते हैं वह ज्ञान स्वरूप, प्रेम स्वरूप, आनंद स्वरूप स्थिति में स्थित रहते हैं। जो हर प्वाइंट को स्वरूप में लायेंगे वही प्वाइंट रूप में स्थित हो सकेंगे। प्वाइंट का मनन अथवा वर्णन करना सहज है लेकिन स्वरूप बन अन्य आत्माओं को भी स्वरूप का अनुभव कराना - यही है सबूत देना अर्थात् सपूत वा साक्षात्कार मूर्त बनना।

स्लोगन:-
एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाओ तो मन-बुद्धि का भटकना बंद हो जायेगा।

ये अव्यक्त इशारे - अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो

कोई भी निर्बल आत्मा आपके सामने आये तो उस निर्बल को बल दो। सर्व-शक्तियों का वर्सा जो प्राप्त किया है वह उसे दो। सर्व आत्माओं को बाप का खज़ाना देने वाले दाता बनो, अपनी शक्तियों द्वारा प्यासी व तड़फती हुई आत्माओं को जी-दान दो, वरदाता बन प्राप्त हुए वरदानों द्वारा उन्हें भी बाप के समीप सम्बन्ध में लाओ, यहाँ के दातापन के संस्कारों से भविष्य में 21 जन्मों तक राज्यपद प्राप्त होगा।